1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. जीवन मंत्र
  4. Holi 2021: जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है धुलेंडी पर्व

Holi 2021: जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है धुलेंडी पर्व

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Mar 27, 2021 01:13 pm IST,  Updated : Mar 27, 2021 01:13 pm IST

होलिका दहन के अगले दिन रंग-गुलाल वाला धुलंडी का त्योहार मनाया जाता है। जानिए रंगों का यह त्योहार धुलेंडी मनाने का कारण।

Holi 2021: जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है धुलंडी पर्व- India TV Hindi
Holi 2021: जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है धुलंडी पर्व Image Source : INSTAGRAM/KRITUU16

होलिका दहन के अगले दिन रंग-गुलाल वाला धुलेंडी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोगों पर रंगों का खुमार चढ़कर बोलता है। इस दिन हर कोई सब गिले-शिकवे भुला एक-दूसरे के रंग में रंग जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि आखिर धुलेंडी की शुरुआत कैसे हुई। जानिए रंगों का यह त्योहार धुलेंडी मनाने का कारण। आपको बता दें कि धुलेंडी को धुलंडी, धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

धुलेंडी पर्व का उल्‍लेख पुराणों में भी मिलता है। इसके मुताब‍िक चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा तिथ‍ि को धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे दो कथाएं प्रचलित है। पहली कथा के अनुसार धलुंडी के दिन भोलेनाथ ने कामदेव को उनकी तपस्‍या भंग करने के प्रयास में भस्‍म कर दिया था। लेकिन देवी रति की प्रार्थना पर उन्‍होंने कामदेव को क्षमा दान देकर पुर्नजन्‍म दिया। इसके साथ ही देवी रति को यह वरदान दिया कि वह श्रीकृष्‍ण के पुत्री रूप में जन्‍म लेंगी। कामदेव के पुर्नजन्‍म और देवी रति को प्राप्‍त वरदान की खुशी में संपूर्ण विश्‍व में फूलों की वर्षा हुई।  इसी कारण इस पर्व को धूमधाम से मनायाजाता है। 

Holika Dahan katha: होलिका की पूजा करते समय पढ़ें ये कथा, होगी हर इच्छा पूरी

दूसरी कथा भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद के कारण मनाई जाती हैं। इसके अनुसार असुर हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, लेकिन यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। बालक प्रह्लाद को भगवान कि भक्ति से विमुख करने का कार्य उसने अपनी बहन होलिका को सौंपा, जिसके पास वरदान था कि अग्नि उसके शरीर को जला नहीं सकती।

Holika Dahan 2021: जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और होली पूजन की संपूर्ण सामग्री

भक्तराज प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से होलिका उन्हें अपनी गोद में लेकर अग्नि में प्रविष्ट हो गयी, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति के प्रताप और भगवान की कृपा के फलस्वरूप खुद होलिका ही आग में जल गई। अग्नि में प्रह्लाद के शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ। जब भक्त प्रह्लाद बच गए तो सपूर्ण ब्रह्मांड में खुशी की कहर दौड़ गई और चारों ओर फूलों की बारिश हुई। बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में धुलेंडी का पर्व मनाया जाने लगा।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Religion से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल