धर्म डेस्क: देवगुरु बृहस्पति (गुरु) धनु और मीन राशियों का स्वामी ग्रह है। सामान्यत: गुरु शुभ फल देता है किंतु पापी ग्रह यदि उसके साथ विराजमान हो जाए अथवा गुरु अपनी नीच राशि में स्थित हो तो यही गुरु जातक के लिए अनिष्टकारी हो जाता है अर्थात् अशुभ फल देने लगता है जिससे जातक आर्थिक, मानसिक, शारीरिक एवं पारिवारिक रूप से परेशान हो जाता है।
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आप कोई भी काम करते है तो होने से पहले उसमें कोई न कोई रुकावट आ जाती है। जिससे कारण आपको उसी काम को करने के लिए आपको दो गुनी मेहनत करनी पड़ती है। इसका कारण आपकी कुंडली में गुरु ग्रह खराब होने के कारण हो सकता है।
आप गुरु की पूजा कर हर समस्या से निजात पा सकते है। लगातार 4 गुरुवार ये उपाय करने से आपकी हर इच्छा पूरी होगी।
घी का दीपक
गुरुवार को सूर्योदय से पहले उठें। स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करें।
स्नान
नहाते वक्त अपने नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करे इसके बाद "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करते हुए केसर का तिलक लगाए और केले के वृक्ष में जल अर्पित हुए उसकी धूप- दीप से पूजा करे।