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Navratri 2021: एक ही दिन होगी चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजा, जानिए पूजा विधि, मंत्र और भोग

शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा और कूष्मांडा दोनों ही स्वरूपों की पूजा की जाएगी। जानिए पूजा विधि, मंत्र और भोग

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: October 09, 2021 16:31 IST
maa kushmanda and chandraghanta puja - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV maa kushmanda and chandraghanta puja 

शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा और कूष्मांडा दोनों ही स्वरूपों की पूजा की जाएगी। दरअसल अश्विनी शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि भोर 4 बजकर 55 मिनट तक ही रहेगी। इसलिए नवरात्र का तीसरा दिन और चौथा दिन एक दिन मनाया जाएगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए मां कूष्मांडा और चंद्रघंटा देवी की पूजन विधि और मंत्र।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, भोग और मंत्र

मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा, जिनका वाहन सिंह है और जिनके दस हाथों में से चार दाहिनी हाथों में कमल का फूल, धनुष, जप माला और तीर है और पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है, जबकि चार बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है और पांचवां हाथ वरद मुद्रा में रहता है, उनका स्वरूप भक्तों के लिए बड़ा ही कल्याणकारी है। इनके घंटे की ध्वनि के आगे बड़े से बड़ा शत्रु भी नहीं टिक पाता है, लिहाजा देवी चंद्रघंटा हर परिस्थिति में सभी तरह के कष्टों से छुटकारा दिलाने में सहायक है।

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आज मां चंद्रघंटा के मंत्र का जप किया जाये तो सभी परेशानियों के साथ ही साधक को शुक्र ग्रह से संबंधी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। क्योंकि शुक्र ग्रह पर मां चंद्रघंटा का आधिपत्य रहता है। लिहाजा आज आपको मां चंद्रघंटा के मंत्र का 11 बार जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र है-

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। 
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

मां चंद्रघंटा का भोग

कन्याओं को खीर, हलवा या स्वादिष्ट मिठाई भेट करने से माता प्रसन्न होती है। माता चंद्रघंटा को प्रसाद के रूप में गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाने से जातक को सभी बिघ्न बाधाओं से मुक्ति मिलाती है|

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

माता की चौकी (बाजोट) पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गौमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी,  तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

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स्तोत्र पाठ
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्

माता कूष्मांडा पूजा विधि, भोग और मंत्र

कूष्मांडा एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है कुम्हड़ा यानि कि कद्दू, जिसका हम घर में सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं। मां कूष्मांडा को कुम्हड़े की बलि बहुत ही प्रिय है, इसलिए मां दुर्गा का नाम कूष्मांडा पड़ा। देवी मां की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा नजर आता है जबकि आठवें हाथ में जप की माला रहती है। माता का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है,  लिहाजा अगर आपकी जन्मपत्रिका में सूर्यदेव संबंधी कोई परेशानी हो तो मां कूष्मांडा की उपासना करना आपके लिये बड़ा ही फलदायी होगा। 

नवरात्र के तीसरे दिन देवी मां के इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए | मंत्र इस प्रकार है -
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। 
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

इस मंत्र का जप करने से आपके परिवार में खुशहाली आयेगी और आपके यश तथा बल में बढ़ोत्तरी होगी। आपकी आयु में वृद्धि होगी और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा। 

मां कूष्मांडा को लगाएं ये भोग

माता को इस दिन मालपुआ का प्रसाद चढ़ाने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही आज के दिन कन्याओं को रंग-बिरंगे रिबन व वस्त्र भेट करने से धन की वृद्धि होती है।

ऐसे करें मां कूष्मांडा की पूजा

दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा सच्चे मन से करना चाहिए। फिर मन को अनहत चक्र में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए। सबसे पहले सभी कलश में विराजमान देवी-देवता की पूजा करें फिर मां कूष्मांडा की पूजा करें। इसके बाद हाथों में फूल लेकर मां को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च. दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु।

फिर मां कूष्मांडा के इस मंत्र का जाप करें।
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां की पूजा के बाद महादेव और परमपिता ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा करें।

ध्यान
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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