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सिंहस्थ कुंभ: आज शिप्रा नदी पर शैव और वैष्णव अखाड़ा आखिरी स्नान कर रचेंगे इतिहास

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : May 21, 2016 07:13 am IST,  Updated : May 21, 2016 07:14 am IST

वैशाख शुक्ल 14 मई, शुक्रवार को सिंहस्थ कुंभ के अंतिम स्नान पर देश एवं विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनि क्षिप्रा के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई।

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नई दिल्ली: इस सदी के दूसरे सिंहस्थ का आखिरी स्नान आज होगा। जिसमें इतिहास का पन्नों पर एक नया अध्याय जुडेगा। क्योंकि इस बार शैव, वैष्णव अखाड़े एक साथ स्नान करेगे। यानी कि जहां एक ओर शैव दत्त आखाड़ा में स्नान करेंगे तो वहीं वैष्णव राजघाट में स्नान करेगे। ये दोनों घाट तो आमने-सामने होगे लेकिन दोनों आखाड़े के साधु-संत एक साथ शिप्रा नदी में डुबकी लगाएं।  

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वैशाख शुक्ल 14 मई, शुक्रवार को सिंहस्थ कुंभ के अंतिम स्नान पर देश एवं विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनि क्षिप्रा के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई।

अखाड़ा परिषद द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार शाही स्नान शनिवार तड़के 3 बजे से शुरू हो जाएगा। स्नान पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। दत्त आखाड़ा घाट पर सुबह 7 बजे और राजघाट पर सुबह 11 बजे ऐम श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा।

अभा अखाड़ा परिषद की प्रशासन के साथ अमृत स्नान को लेकर गुरुवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय में बैठक हुई। जिसमें ये तय किया गया कि शैव अखाड़ों का स्नान सुबह 3 बजे से शुरू कर दिया जाए, जिससे कारण आम श्रद्धालु भी जल्द स्नान का लाभ ले सकें। साधु-संतों ने 30 मई तक अखाड़ों को मेला क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का अनुरोध भी किया।

बैठक की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्रगिरिजी ने की। महासचिव हरिगिरि, संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तोर, एडीजी वी मधुकुमार, डीआईजी राकेश गुप्त, कलेक्टर कवींद्र कियावत, एसपी एमएस वर्मा, मेलाधिकारी अविनाश लवानिया सहित 13 अखाड़ों के पदाधिकारी मौजूद थे।

इसके साथ ही बैठक में यह भी तय किया गया कि महामंडलेश्वर अकेले ही स्नान करें, क्योंकि उनके साथ अधिक मात्रा में अनुयायी आ जाते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य व्यव्स्था करने में दिक्कत आती है। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी है कि महामंडलेश्वर अकेले ही स्नान करेंगे। जुलूस में बैंड-बाजे और वाहन सीमित रखने पर भी सहमति बनी।

अगली स्लाइड में पढ़े कब, कौन और कहां करेगा स्नान तके बारें में

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