मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक मजिस्ट्रेट ने पूरे शहर में बिजली की सप्लाई बंद करा दी, क्योंकि उसके घर में बिजली नहीं आ रही थी। मामला चित्रकूट का है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चित्रकूट 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र में शुक्रवार की रात उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मजिस्ट्रेट पर पूरे क्षेत्र की बिजली जबरन बंद कराने का गंभीर आरोप लगा। घटना के बाद चित्रकूट टाउन समेत कई गांव अंधेरे में डूब गए। बिजली गुल होने से नाराज उपभोक्ता बड़ी संख्या में सब स्टेशन पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। मामले में विद्युत कंपनी के अधिकारियों ने चित्रकूट थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने आवेदन दिया है, हालांकि देर रात तक पुलिस ने केवल आवेदन ही लिया था।
जानकारी के अनुसार गुरुवार-शुक्रवार की रात आए तेज अंधड़ और तूफान के कारण चित्रकूट क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। कई स्थानों पर बिजली लाइनें टूट गईं और पोल भी क्षतिग्रस्त हो गए। विद्युत अमले द्वारा लगातार मरम्मत कार्य कर अधिकांश इलाकों की बिजली बहाल कर दी गई थी, लेकिन मजिस्ट्रेट आवास की ओर जाने वाली लाइन में फाल्ट होने के कारण वहां सप्लाई शुरू नहीं हो सकी थी।
मजिस्ट्रेट ने पूरे इलाके में बंद कराई बिजली
इसी बात को लेकर मजिस्ट्रेट रामअवतार पटेल शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ से नौ बजे के बीच सीधे चित्रकूट 33/11 केवी सब स्टेशन पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने कंट्रोल पैनल रूम में पहुंचकर ड्यूटी पर तैनात ऑपरेटर से अभद्रता की और कहा कि जब उनकी बिजली बंद है तो बाकी क्षेत्र की बिजली भी बंद कर दी जाए। बताया जा रहा है कि मजिस्ट्रेट के दबाव और फटकार के चलते ऑपरेटर ने कंट्रोल पैनल का घोड़ा गिरा दिया, जिससे पूरे वितरण केंद्र की बिजली सप्लाई बंद हो गई और चित्रकूट नगर सहित आसपास के कई गांव अंधेरे में डूब गए।
मजिस्ट्रेट की बात सुन भड़के लोग
अचानक बिजली गुल होने से परेशान उपभोक्ता सीधे सब स्टेशन पहुंचने लगे। इनमें छात्र भी शामिल थे। उपभोक्ताओं ने जब बिजली बंद होने का कारण पूछा तो ऑपरेटर ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि “जज-मजिस्ट्रेट साहब आए थे और उन्होंने बिजली बंद करा दी।” इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया और बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने सब स्टेशन परिसर में बैठकर हंगामा शुरू कर दिया। लोगों की मांग थी कि जिसने बिजली बंद कराई है, वही आकर बिजली चालू कराए।
पुलिस ने शुरू कराई बिजली सप्लाई
स्थिति बिगड़ती देख विद्युत कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बाद में ऑपरेटर को साथ लेकर चित्रकूट थाने पहुंचे, जहां पूरे मामले की शिकायत पुलिस को सौंपी गई। सूत्रों के अनुसार बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और विद्युत सप्लाई बहाल कराई गई। घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि यह संभवतः प्रदेश का पहला मामला होगा, जब न्यायपालिका से जुड़े किसी अधिकारी पर विद्युत उपकेंद्र में पहुंचकर इस तरह दबाव बनाने और पूरे क्षेत्र की बिजली बंद कराने जैसे आरोप लगे हों। फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है।
(सतना से अमित त्रिपाठी की रिपोर्ट)
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