मध्य प्रदेश के इंदौर में 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली है और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। यह काम तीन साल से लटका हुआ था। अगर तीन साल पहले नर्मदा पाइपलाइन बिछ जाती तो दूषित पानी के कारण 15 लोगों की मौत नहीं होती और कई अन्य घायल नहीं होते। साल 2022 में भागीरथपुरा में नर्मदा पाइपलाइन बिछाने के काम को मंजूरी मिली थी। पूरा प्रोजेक्ट 2.4 करोड़ का था और दो चरणों में पाइपलाइन बिछाने का काम होना था, लेकिन प्रशासन ने तीन साल तक इसे लटकाए रखा।
तीन साल पहले मंजूरी मिलने के बावजूद पहले फेज का काम अब तक अधूरा है। वहीं, दूसरे फेज का काम तब शुरू हुआ, जब दूषित पानी के कारण 10 लोगों की मौत हो चुकी थी। इसके लिए 31 दिसंबर को वर्क ऑर्डर जारी किया गया। सरकारी लापरवाही और नगर निगम प्रशासन की नाकामी के चलते फाइलें सरकारी दफ्तरों में घूमती रहीं और काम अटका रहा।
बच सकती थीं 15 जानें
तीन साल पहले जिस नर्मदा जल पाइपलाइन को बिछाया जाना था, वह अब मौतों के बाद जमीन के नीचे उतारी जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह काम पहले नहीं हो सकता था। क्या 15 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। आज भागीरथपुरा की तंग गलियों में जेसीबी मशीनों की आवाज गूंज रही है। यह शोर विकास का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, जो 15 जिंदगियां खत्म होने के बाद जागी।
2 करोड़ की लागत से बदल रहे पाइपलाइन
इलाके में नई पाइपलाइन बिछाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से इस पूरे क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था को अब बदला जा रहा है। दर्शन यहां मौजूद पुरानी पाइपलाइन को बदलकर नर्मदा जल लाने के लिए नई पाइपलाइन की प्रक्रिया 3 साल पहले शुरू हुई थी नगर परिषद की बैठक में प्रस्ताव भी पास हो गया बावजूद इसके जिम्मेदारों ने लापरवाही बरती। भागीरथपुरा में 27 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइन को हटाकर नर्मदा जल लाने की योजना जुलाई 2022 में ही शुरू हो गई थी। नगर निगम ने 2 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से दो चरणों में पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया।
पहले चरण की फाइलों का सच
जुलाई 2022 ----पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी
25 नवंबर 2022 --- महापौर परिषद से मंजूरी
3 फरवरी 2023 --- लगभग ढाई महीने बाद अपर आयुक्त के हस्ताक्षर
6 फरवरी 2023 ---मेयर पुष्यमित्र भार्गव के हस्ताक्षर
इसके बावजूद पहले चरण का काम अब तक पूरा नहीं हुआ।
पाइपलाइन बिधाने के दूसरे फेज को पूरा न कर पाना भागीरथपुरा के 15 लोगों के लिए बेहद महंगा साबित हुआ। दूसरे चरण की तैयारी नवंबर 2024 में ही हो चुकी थी, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ीं।
दूसरे चरण की टाइमलाइन
नवंबर 2024 --- फाइल तैयार
8 अगस्त 2025 -- 9 महीने बाद टेंडर जारी
17 सितंबर 2025 --टेंडर खुलना था, लेकिन नहीं खुला
इसी दौरान 27 साल पुरानी पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज हुआ और दूषित पानी घर-घर पहुंचने लगा। महज 10 दिन में 15 लोगो की मौत हुई। वहीं हजारों की संख्या में लोग बीमार हुए। सैकड़ों लोगों को अस्पताल जाना पड़ा। सबसे शर्मनाक तस्वीर रही जब 30 दिसंबर 2025 को अपार आयोग रोहित सिसोदिया ने इस फाइल पर हस्ताक्षर किए।
31 दिसंबर को खुला टेंडर
31 दिसंबर 2025 को टेंडर खोला गया और ठेकेदार को वर्क आर्डर जारी किया। तब तक चार मौतें हो चुकी थी। अब पूरे भागीरथपुरा में नर्मदा जल की पाइपलाइन के लिए पाइप दिखाई दे रहे हैं और जेसीबी के ब्रेकर द्वारा ड्रेनेज और नर्मदा पाइपलाइन के लिए खुदाई शुरू हो रही है। लेकिन ये खुदाई आज से एक महीने पहले भी हो सकती थी। सूत्रों की मानें तो इस पाइपलाइन के लिए टेंडर प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी। यह कार्रवाई देर आए दुरुस्त आए वाली नहीं है। यह उन 15 मौतों के दबाव का नतीजा है। 2 हजार चैंबरों की जांच में नाकाम रहने के बाद अब पूरी लाइन बदलना ही आखिरी रास्ता बचा था।
अभी भी 27 मरीजों की हालत नाजुक
सरकार ने फाइल पास में करने के जिम्मेदार नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटाया, जिसने 8 महीने फाइल रोक रखी। इसके साथ अपर आयोग रोहित सिसोदिया को भी सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा जल्द वितरण विभाग का विभाग वापस लेते हुए इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को भी सस्पेंड किया गया। फिलहाल भले ही नई पाइपलाइन का काम शुरू हो गया हो, लेकिन खतरा टला नहीं है। अस्पतालों में अब भी 208 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 27 की हालत नाजुक बनी हुई है। क्षेत्र की जनता अब भी टैंकरों के भरोसे है, क्योंकि जमीन के भीतर से मौत का रिसाव अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
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