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'RSS कोई पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है, BJP को देखकर...', संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिया बड़ा बयान

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jan 03, 2026 02:45 pm IST,  Updated : Jan 03, 2026 02:45 pm IST

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भोपाल में स्पष्ट किया कि RSS एक अर्धसैनिक संगठन नहीं है, बल्कि समाज को एकजुट करने और सद्गुणों को बढ़ावा देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि संघ के खिलाफ गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं और इसे समझने के लिए सही जानकारी जरूरी है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत। Image Source : PTI

भोपाल: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को साफ किया कि वर्दी और शारीरिक अभ्यास के बावजूद संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को देखकर RSS के बारे में निष्कर्ष निकालने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी। भागवत ने भोपाल में प्रबुद्धजनों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एकजुट करने और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करने का कार्य करता है, ताकि भारत दोबारा किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए। उन्होंने कहा, 'हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन समझता है तो यह भूल होगी।'

'आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते'

RSS प्रमुख ने आगे कहा कि संघ एक अनूठा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है। भागवत ने कहा, 'अगर आप बीजेपी को देखकर संघ को समझना चाहते हैं तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। यही गलती तब भी होगी, जब आप विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेंगे।' बता दें कि RSS को जनसंघ और उसके उत्तराधिकारी सत्तारूढ़ बीजेपी का वैचारिक मूल संगठन माना जाता है। भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ एक 'झूठा नैरेटिव' गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते। वे स्रोत तक नहीं पहुंचते, बल्कि विकिपीडिया देख लेते हैं। वहां सब कुछ सही नहीं होता। जो भरोसेमंद स्रोतों तक जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में सही जानकारी मिलेगी।'

'संघ की भूमिका और उद्देश्य को साफ करना जरूरी'

भागवत ने कहा कि इन्हीं भ्रांतियों के कारण संघ की भूमिका और उद्देश्य को साफ करना जरूरी हो गया है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर के उनके दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि आम धारणा है कि संघ का जन्म किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में हुआ, जबकि ऐसा नहीं है। भागवत ने कहा, 'संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं करता।' उन्होंने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले लोग नहीं थे। संघ प्रमुख ने कहा कि बार-बार दूर-दराज से आए कुछ गिने-चुने लोग, जो भारतीयों से हर दृष्टि से कमजोर थे, उन्होंने हमें पराजित किया।

'संघ अब किसी बाहरी धन या चंदे पर निर्भर नहीं है'

भागवत ने आगे कहा, 'वे न तो हम जैसे समृद्ध थे और न ही हम जैसे सदाचारी। देश की बारीकियों को जाने बिना भी वे हमारे घर में हमें हराते रहे। ऐसा 7 बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। तब सवाल उठता है कि आजादी की गारंटी क्या है? हमें यह सोचने की जरूरत है कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ।' भागवत ने कहा कि समाज को स्वयं को समझते हुए स्वार्थ से ऊपर उठना होगा। उनके अनुसार, यदि समाज गुणों और मूल्यों के साथ एकजुट होकर खड़ा होता है तो देश का भविष्य निश्चित रूप से बेहतर होगा। भागवत ने कहा कि संघ की वित्तीय स्थिति अब ठीक है और वह किसी बाहरी धन या चंदे पर निर्भर नहीं है।

'अगर मेरी बातों पर भी पूरा विश्वास न हो तो कोई बात नहीं'

संघ प्रमुख ने पिछले 100 वर्षों में संगठन द्वारा झेली गई आर्थिक कठिनाइयों को भी याद किया। अपने संबोधन के अंत में भागवत ने लोगों से संघ को बेहतर ढंग से समझने के लिए किसी ‘शाखा’ में आने की अपील की। उन्होंने कहा, 'मैंने संघ के बारे में अपने विचार रखे हैं। समझना है तो भीतर आकर समझिए। अगर मेरी बातों पर भी पूरा विश्वास न हो तो कोई बात नहीं। सबसे अच्छा तरीका है कि अंदर आकर संघ को समझा जाए। अगर मैं 2 घंटे यह समझाऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तो भी बात नहीं बनेगी। एक चम्मच चीनी चख लीजिए, खुद समझ में आ जाएगा।'

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