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'दुनिया के कल्याण के लिए भारत को विश्वगुरु बनना होगा', हैदराबाद में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

Edited By: Amar Deep @amardeepmau Published : Dec 28, 2025 09:14 pm IST, Updated : Dec 28, 2025 09:14 pm IST

हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को विश्वगुरु बनने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारी महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि दुनिया की जरूरत है।

मोहन भागवत।- India TV Hindi
Image Source : ANI मोहन भागवत।

हैदराबाद: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान विश्वगुरु बनने को लेकर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का विश्वगुरु बनने का सफर केवल राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का मामला नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आवश्यकता है। हैदराबाद में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के विकास तथा सामाजिक परिवर्तन पर अटूट ध्यान केंद्रित करना आवश्यक होगा। मोहन भागवत ने आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शन में अग्रणी के रूप में विश्व में भारत की भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "विश्वगुरु बनना हमारी महत्वाकांक्षा नहीं है।"

'टेक्नोलॉजी इंसानियत की मालिक नहीं बनेगी'

हैदराबाद में मोहन भागवत ने कहा, "आज, हमें दुनिया को दिखाना है कि टेक्नोलॉजी आएगी, सोशल मीडिया होगा, AI आएगा, सब कुछ आएगा। लेकिन टेक्नोलॉजी के कोई नकारात्मक परिणाम नहीं होंगे। टेक्नोलॉजी इंसानियत की मालिक नहीं बनेगी। इंसानियत टेक्नोलॉजी की मालिक रहेगी। और इंसानी बुद्धि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को दुनिया की भलाई की ओर ले जाएगी। यह राक्षसी प्रवृत्तियों की ओर नहीं जाएगी। यह दैवीय प्रवृत्तियों की ओर जाएगी। यह कैसे होगा? हम यह कैसे करेंगे? हमें इसे अपने कामों से दिखाना होगा। हमें इसे जीकर दिखाना होगा।"

'हमें फिर से 'विश्वगुरु' बनना होगा'

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "हमें फिर से 'विश्वगुरु' बनने का काम करना होगा। 'विश्वगुरु' बनना हमारी महत्वाकांक्षा नहीं है। यह दुनिया की ज़रूरत है कि हम 'विश्वगुरु' बनें। लेकिन यह ऐसे ही नहीं बनता। इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यह कड़ी मेहनत कई धाराओं से चल रही है। उनमें से एक संघ भी है। व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करके, हम लोगों के व्यक्तित्व का विकास करते हैं और उन्हें समाज में बदलाव लाने के लिए अलग-अलग कार्यस्थलों पर भी भेजते हैं। आज हर जगह उनके काम की तारीफ होती है। उन्हें समाज का भरोसा मिलता है।"

'सेवा के बदले कुछ नहीं चाहिए'

मोहन भागवत ने कहा, "सेवा कई कारणों से की जाती है। हर पांच साल में, हम ऐसे लोगों की बाढ़ देखते हैं जो सेवा करना चाहते हैं। वे हाथ जोड़कर और बड़ी मुस्कान के साथ घर-घर जाते हैं, और कहते हैं, 'हमें आपकी सेवा करने का मौका दीजिए।' अब, ऐसे बहुत सारे लोग होते हैं, और फिर आप उन्हें पांच साल तक दोबारा नहीं देखते। क्यों? क्योंकि सेवा बाद में इनाम की उम्मीद में की जा रही है, इसीलिए यह सच्ची सेवा नहीं है। यह एक लेन-देन है। हम आपका काम करेंगे, आप हमारा काम कीजिए। सेवा करने वाले का अधिकार सिर्फ सेवा करना होता है और कुछ नहीं। सेवा मेरा कर्तव्य है और इसके बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए।"

'सनातन का पुनरुत्थान भगवान की इच्छा है'

उन्होंने आगे कहा, "वह समय अब आ गया है। 100 साल पहले, जब योगी अरविंद ने घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान भगवान की इच्छा है, और हिंदू राष्ट्र का उदय सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए है। भारत या हिंदू राष्ट्र, और सनातन धर्म, हिंदुत्व, ये सब एक ही बात हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब हमें उस प्रक्रिया को जारी रखना है। हम देख रहे हैं कि भारत में संघ के प्रयास और अपने-अपने देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघों के प्रयास एक जैसे हैं, यानी हिंदू समुदाय को संगठित करना। पूरी दुनिया में धार्मिक जीवन जीने वाले समाज का उदाहरण पेश करना, धार्मिक जीवन जीने वाले लोगों के उदाहरण पेश करना। उसके आधार पर विश्व का आचरण बदल जाए, इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न हो इसके लिए यह प्रयास है।"

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