बीजिंग: चीन की सरकार ने 1 जनवरी 2026 से कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां और ऐसे ही अन्य उपकरणों पर 13 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। वहीं, बच्चों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं को वैल्यू-ऐडेड टैक्स यानी कि VAT से पूरी तरह छूट दे दी गई है। यह बदलाव 2025 के अंत में घोषित एक बड़े टैक्स सुधार का हिस्सा है। इस सुधार में 1994 से चली आ रही छूट को खत्म किया गया है, जब चीन में दशकों पुरानी 'एक बच्चा नीति' सख्ती से लागू थी। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब शादी से जुड़ी सेवाओं और बुजुर्गों की देखभाल को भी VAT से छूट मिलेगी। बता दें कि ये सब कुछ इसलिए किया जा रहा है ताकि जनसंख्या में गिरावट का सामना कर रहे चीन में ज्यादा बच्चे पैदा हों।
चीन ने 'एक बच्चा नीति' क्यों छोड़ी?
1 जनवरी 2026 को चीन की 'एक बच्चा नीति' को खत्म हुए पूरे 10 साल हो गए। यह नीति आधिकारिक रूप से 1980 में शुरू हुई थी। इसका मकसद था कि तेजी से बढ़ती आबादी को रोककर देश को गरीबी से बाहर निकाला जाए। दशकों तक इस नीति को लागू करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रचार किया, पॉलिसी उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कभी-कभी जबरदस्ती गर्भपात या नसबंदी जैसे कठोर तरीके अपनाए। लेकिन आखिरकार सरकार ने माना कि जन्म दर में गिरावट से अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा है, इसलिए 2016 में इस नीति को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सरकार आबादी बढ़ाने पर जोर दे रही है।
लगातार क्यों घट रही है चीन की आबादी?
बड़े परिवारों को प्रोत्साहन देने के लिए कई इनाम दिए गए, लेकिन चीन की आबादी लगातार घट रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में 2024 में लगातार तीसरे साल आबादी घटी, और विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट जारी रहेगी। चीन तेजी से बूढ़ा हो रहा है। 1.4 अरब की आबादी में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग अब 20 प्रतिशत से अधिक हैं। संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणी है कि 2100 तक यह आंकड़ा लगभग आधा हो सकता है। ऐसे में चीन के लिए तेजी से विकास की दौड़ को जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
चीन में बच्चे पालना इतना मुश्किल क्यों?
चीन में बच्चे पालने का खर्च बहुत ज्यादा है, जो लोगों को ज्यादा संतानों को जन्म देने से रोकता है। बीजिंग के युवा पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन बच्चों को पालने-पोसने के मामले में दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक है। BBC की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल फीस जैसे खर्च इसे और बढ़ाते हैं। आर्थिक अनिश्चितता ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। प्रॉपर्टी संकट की वजह से घरेलू बचत घट गई है, जिससे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा, युवाओं में बेरोजगारी ज्यादा है और बच्चे की देखभाल का बोझ ज्यादातर महिलाओं पर पड़ता है।
गर्भनिरोधकों पर 13% VAT लगाया गया
चीन में गर्भनिरोधकों पर 13 फीसदी वैट लगाया गया है। इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है और लोग इसका मजाक भी उड़ा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे अनचाही गर्भावस्था और HIV जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कई लोग कहते हैं कि कंडोम महंगा होने से उन जोड़ों का मन नहीं बदलेगा जो बच्चे नहीं चाहते। हाल के सालों में स्थानीय सरकारों ने टैक्स छूट, घर खरीदने में मदद, नकद इनाम और लंबी मैटरनिटी लीव जैसे कई प्रोत्साहन दिए हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। CNN की रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं को कम्युनिटी वर्कर्स से बच्चे पैदा करने के प्लान के बारे में फोन आने की खबरें आई हैं, जिससे डर है कि ये नीतियां जबरदस्ती वाली हो सकती हैं।




