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भारत की जनसंख्या 2061 के बाद घटेगी, सदी के अंत तक चीन से दोगुनी होगी आबादी

 Published : Jul 11, 2025 01:35 pm IST,  Updated : Jul 11, 2025 01:37 pm IST

भारत की जनसंख्या 2061 में 1.7 अरब पर पहुंचकर घटने लगेगी, लेकिन फिर भी 2100 तक दुनिया का सबसे आबादी वाला देश बना रहेगा। महिलाओं की भागीदारी और शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार से भारत जनसांख्यिकीय चुनौतियों को अवसर में बदल सकता है।

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मौजूदा सदी के अंत तक चीन की जनसंख्या भारत से आधी रह जाएगी। Image Source : PTI FILE

नई दिल्ली: भारत की जनसंख्या में आने वाले कुछ सालों में बेहद अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। मैकिन्जी की एक ताजा डेमोग्राफिक रिपोर्ट और संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2024 के अनुसार, भारत की आबादी 2061 में अपने चरम पर पहुंचकर 1.7 अरब हो जाएगी, जिसके बाद इसमें गिरावट शुरू होगी। लेकिन इस गिरावट के बावजूद भारत सदी के अंत तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा। अनुमान है कि 2100 तक भारत की जनसंख्या 1.5 अरब होगी, जो तब की चीन की जनसंख्या (63.3 करोड़) से दोगुनी से भी ज्यादा होगी।

2100 में 1.5 अरब पर आ जाएगी जनसंख्या

मैकिन्जी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रजनन दर यानी कि फर्टिलिटी रेट 1.98 बच्चे प्रति महिला है, जो 2.1 के रिप्लेसमेंट रेट से कम है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि भारत की जनसंख्या 2054 में 1.69 अरब तक बढ़ेगी और 2061 में 1.70 अरब के शिखर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे घटकर 2100 में 1.5 अरब पर आ जाएगी। दूसरी ओर, चीन की जनसंख्या 2024 में 1.41 अरब है, जो 2054 तक 1.21 अरब और 2100 तक 63.3 करोड़ तक सिमट जाएगी। यह गिरावट चीन की अति-निम्न प्रजनन दर (1.14 बच्चे प्रति महिला) के कारण है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक, चीन की जनसंख्या में 2054 तक 20.4 करोड़ और सदी के अंत तक 78.6 करोड़ की कमी आएगी।

भारत के सामने होंगी कई तरह की चुनौतियां

मैकिन्जी की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि जनसंख्या में बुजुर्गों की बढ़ती तादाद से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। 2050 तक प्रत्येक बुजुर्ग के पीछे केवल 4.6 कामकाजी लोग होंगे, जो अभी 10 हैं। 2100 तक यह अनुपात 1.9 तक पहुंच जाएगा, जो आज जापान की स्थिति जैसा है। इससे सरकारी खजाने और परिवारों पर बुजुर्गों की देखभाल का बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा, 1997 से 2023 तक भारत की युवा आबादी ने प्रति व्यक्ति GDP में हर साल 0.7 फीसदी की वृद्धि में योगदान दिया, लेकिन 2050 तक यह योगदान घटकर 0.2 फीसदी रह जाएगा।

महिलाओं के दम पर चुनौतियों से निपट सकता है भारत

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी, जो कि मौजूदा समय में 20-49 वर्ष की आयु में मात्र 29 फीसदी है, को बढ़ाकर इस जनसांख्यिकीय चुनौती से निपट सकता है। अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा 50-70% है। इसके साथ ही, भारत की वैश्विक खपत में हिस्सेदारी 2024 में 9% से बढ़कर 2050 में 16% हो जाएगी, जिससे भारत का वैश्विक महत्व और बढ़ेगा। बता दें कि चीन की तुलना में भारत की जनसंख्या संरचना अभी युवा है। 2024 में भारत की औसत आयु 28.4 वर्ष थी, जबकि चीन की 39.6 वर्ष। 2100 तक भारत की औसत आयु 47.8 वर्ष और चीन की 60.7 वर्ष हो जाएगी।

भारत को उठाने पड़ेंगे कुछ बड़े कदम

भारत के लिए यह समय अपनी जनसांख्यिकीय ताकत को आर्थिक शक्ति में बदलने का है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर, और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस को अपनाने से भारत 2061 के बाद जनसंख्या में गिरावट के बावजूद वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत रख सकता है। अगर भारत अभी से सही कदम उठाए, तो वह न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को बुलंदियों पर ले जा सकता है, बल्कि सदी के अंत तक चीन से दोगुनी जनसंख्या के साथ वैश्विक मंच पर एक सशक्त भूमिका निभा सकता है।

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