इंदौर: मध्य प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाला शहर इंदौर एक बार फिर से दूषित पानी के कारण चर्चा में है, जो स्वच्छता के मामले में नंबर 1 का खिताब 8 बार अपने नाम कर चुका है। दरअसल, इंदौर के महावीर नगर में दूषित पेयजल से कई लोगों के बीमार होने के दावों के अगले दिन स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को कहा कि इस क्षेत्र में फिलहाल स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। विभाग ने दावा किया कि महावीर नगर के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में उल्टी-दस्त से पीड़ित कोई भी मरीज भर्ती नहीं है।
इंदौर में पानी बना बीमारियों की वजह
यह मामला देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से कई लोगों की मौत के करीब छह महीने बाद सामने आई है। जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी सरकारी विज्ञप्ति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी के हवाले से कहा गया है।
'महावीर नगर क्षेत्र में मंगलवार को कुछ लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षणों की सूचना प्राप्त होते ही स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत रिस्पांस टीम (आरआरटी) को मौके पर भेजा। आरआरटी ने क्षेत्र की गहराई और बारीकियों के साथ जांच की। लगभग 85 घरों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया।'
स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई
माधव प्रसाद हासानी के अनुसार सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि इस क्षेत्र के किसी भी शासकीय और निजी चिकित्सालय में उल्टी-दस्त से पीड़ित कोई भी मरीज भर्ती नहीं है। उन्होंने कहा:
'स्थानीय स्तर पर 15 से 20 लोगों में उल्टी-दस्त जैसे लक्षण होने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई, जिनके खून के सैंपल लिए गए। हालांकि, जांच के लिए आवश्यक मल (स्टूल) के नमूने इनमें से किसी भी व्यक्ति द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए।'
इंदौर में दूषित पानी से जुड़ा क्या है पूरा मामला
सीएमएचओ ने आगे कहा कि फिलहाल महावीर नगर में स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस क्षेत्र में ओआरएस के पैकेट और क्लोरीन की गोलियों का एहतियातन वितरण किया है। महावीर नगर में एक सरकारी नलकूप में कथित तौर पर सीवेज के पानी के रिसाव से पेयजल दूषित होने की शिकायत के बाद मंगलवार को कई लोगों ने उल्टी, दस्त और पेट संबंधी समस्याएं होने का दावा किया था। इसके बाद नगर निगम ने संबंधित नलकूप का उपयोग बंद करा दिया था और क्षेत्र में टैंकर के जरिये जलापूर्ति शुरू की थी।
इंदौर में दूषित पेयजल पर दूसरी बार मचा हंगामा
इससे पहले शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से कई लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की मौत हुई। हालांकि, इस मामले पर विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को चर्चा के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई।
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