महाराष्ट्र की राजनीति में रायगढ़ जिले की म्हसला नगर पंचायत ने बड़ा सियासी संदेश दिया है। सुनील तटकरे और अदिति तटकरे का गढ़ माने जाने वाले म्हसला में पिछले 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस को जीत नहीं मिली तो उसने शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया। शिंदे की शिवसेना ने कांग्रेस के समर्थन से नगर पंचायत की सत्ता पर कब्जा जमाते हुए भगवा फहरा दिया है। गुरुवार की दोपहर विशेष सभा में नगर अध्यक्ष पद के लिए मतदान हुआ, जिस पर पूरे रायगढ़ जिले और राज्य की नजरें टिकी थीं। 17 सदस्यीय सदन में शिंदे गुट के उम्मीदवार शाहिद जंजीरकर को 9 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। वहीं एनसीपी उम्मीदवार सुनील शेडगे को 6 वोट मिले, जबकि एक नगरसेवक अनुपस्थित रहा।
पिछले कई महीनों से लिखी जा रही थी पटकथा
इस राजनीतिक उलटफेर की पटकथा पिछले कई महीनों से लिखी जा रही थी। दिसंबर 2025 में नगर परिषद चुनाव के बाद नगराध्यक्ष पद खाली था, क्योंकि एनसीपी के सात नगरसेवकों ने शिंदे गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया था। इसके खिलाफ एनसीपी ने दल-बदल कानून के तहत शिकायत की, जिसके बाद जनवरी 2026 में रायगढ़ जिलाधिकारी ने सात नगरसेवकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। उस समय इसे भरत गोगावले के लिए बड़ा झटका माना गया था लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरण में शिंदे गुट ने कांग्रेस के तीन नगरसेवकों का समर्थन हासिल कर लिया। शिंदे गुट के पास अपने 6 वोट थे, कांग्रेस के समर्थन से आंकड़ा 9 तक पहुंचा और सत्ता परिवर्तन हो गया।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। अरविंद सावंत ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कांग्रेस की विचारधारा का विरोध कर शिंदे गुट ने बगावत की थी, आज वही कांग्रेस उनके साथ खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि अब शिंदे गुट को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या कांग्रेस की विचारधारा उन्हें मंजूर है। वहीं मनीषा कायंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि गठबंधन धर्म का उल्लंघन सबसे पहले उद्धव ठाकरे ने किया था, जब वे कांग्रेस के साथ गए थे। उन्होंने दावा किया कि म्हसला में कोई औपचारिक गठबंधन नहीं हुआ, बल्कि विकास कार्यों के कारण कांग्रेस के कुछ स्थानीय नगरसेवकों ने शिंदे गुट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं और इसका महायुति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हर्षवर्धन सपकाल का बड़ा बयान
इस बीच हर्षवर्धन सपकाल भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि स्थानीय नेताओं ने स्थानीय समीकरणों को देखते हुए फैसला लिया है, लेकिन कांग्रेस आधिकारिक तौर पर शिंदे शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है और जरूरत पड़ने पर संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक कांग्रेस ने तटकरे परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन म्हसला में हुआ यह सत्ता परिवर्तन रायगढ़ की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरणों का संकेत जरूर माना जा रहा है।