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'मुंबई में बाढ़ हमारी अपनी बनाई हुई समस्या', बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा सिर्फ BMC को दोष देना बंद करें

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jul 07, 2026 11:23 pm IST,  Updated : Jul 08, 2026 12:10 am IST

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नागरिकों को मुंबई में मानसून के दौरान बार-बार होने वाले जलभराव के लिए सिर्फ़ BMC को दोष देना बंद कर देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण, बंद नालियों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के गलत इस्तेमाल की वजह से यह स्थिति हमारी अपनी बनाई हुई है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मुंबई में मानसून के दौरान बार-बार होने वाले जल-जमाव के लिए सिर्फ़ बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण, बंद नालियां और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल शहर में बाढ़ की समस्याओं की बड़ी वजहें हैं। 

सायन-ट्रॉम्बे स्ट्रेच पर मंडला गांव में सड़क चौड़ी करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान, एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने कहा कि जल-जमाव की कई समस्याएं सिर्फ़ सिविक अथॉरिटीज़ की वजह से नहीं, बल्कि लोगों की हरकतों की वजह से होती हैं।

कोर्ट ने बताया क्यों होता है जलभराव

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्टिंग चीफ जस्टिस घुगे ने कहा, "सड़कों पर बारिश का पानी दिखना तय है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। हमें ज़मीन हड़पने की अजीब आदत है। हम नालियां बंद कर देते हैं। थोड़ी सी बारिश से ही सड़कें जाम हो जाती हैं। यह सब हमारी ही करतूत है।"

कोर्ट ने पब्लिक जगहों के गलत इस्तेमाल की ओर भी इशारा किया। "कॉर्पोरेशन ने हमें फुटपाथ दिए, हमने उन पर पाव-भाजी के स्टॉल लगाने शुरू कर दिए। जज ने कहा, "हमारी आदत अपनी ही मातृभूमि को लूटने की है।"

इस मामले की सुनवाई कर रहा है कोर्ट

ये बातें तब सामने आईं जब कोर्ट BMC की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहा था जिसमें मंडला गांव में एक सड़क को 30 फीट से 50 फीट तक चौड़ा करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से ज़मीन मांगी गई थी। नगर निकाय ने कोर्ट को बताया कि उसने अपने अधिकार क्षेत्र वाली ज़मीन से अतिक्रमण हटा दिया है और प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी बाकी ज़मीन विभाग के पास है। इसके बाद बेंच ने DAE को नोटिस जारी किया।

BMC की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि नगर निकाय ने मौजूदा 30 फीट चौड़ी सड़क के किनारे से अतिक्रमण हटा दिया है। इस प्रक्रिया में लगभग 192 पेड़ भी काटे गए। हालांकि, उन्होंने कहा कि सड़क को 50 फीट तक चौड़ा करने के लिए ज़रूरी अतिरिक्त ज़मीन DAE के अधिकार क्षेत्र में आती है, जो पास ही स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) का कामकाज देखता है। साठे ने कहा कि अगर ज़रूरी ज़मीन मिल जाए तो नगर निकाय सड़क चौड़ी करने के लिए तैयार है।

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