1. Hindi News
  2. महाराष्ट्र
  3. डॉक्टर पर लगा 6 महिला डॉक्टरों से छेड़छाड़ का आरोप, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

डॉक्टर पर लगा 6 महिला डॉक्टरों से छेड़छाड़ का आरोप, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

 Published : May 11, 2025 10:38 am IST,  Updated : May 11, 2025 10:38 am IST

बॉम्बे हाई कोर्ट ने KEM हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र देवकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। उन पर 6 महिला डॉक्टरों से छेड़छाड़ का आरोप है। कोर्ट ने पीड़िताओं के मानसिक आघात और सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

Bombay High Court, Ravindra Devkar, KEM Hospital, anticipatory bail- India TV Hindi
अदालत ने डॉक्टर की अग्रिम जमानत की अर्जी ठुकरा दी। Image Source : PTI FILE

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने KEM हॉस्पिटल के एक सीनियर डॉक्टर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें कि इस डॉक्टर पर 6 महिला जूनियर डॉक्टरों के साथ छेड़छाड़ का आरोप है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पीड़िताओं को हुए ‘इमोशनल और साइकोलॉजिकल ट्रॉमा’ को ध्यान में रखना जरूरी है। हाई कोर्ट ने 8 मई को डॉ. रविंद्र देवकर, जो KEM हॉस्पिटल के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट में एडिशनल प्रोफेसर हैं, की अग्रिम जमानत याचिका को ठुकरा दिया। हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने वाली पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि देवकर ने उन्हें गलत तरीके से छुआ था और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

‘कोई भी शिकायत करने के लिए तैयार नहीं था’

जस्टिस राजेश पाटिल की बेंच ने कहा कि देवकर लंबे समय से अपने प्रभावशाली पद का फायदा उठाकर गलत व्यवहार कर रहे थे। कोर्ट ने नोट किया कि अब तक कोई भी सीनियर डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने को तैयार नहीं था, क्योंकि वे ट्रॉमेटाइज्ड थे और डरते थे कि उनका करियर प्रभावित हो सकता है। बेंच ने कहा कि अगर देवकर को अग्रिम जमानत दी गई, तो इसकी पूरी संभावना है कि वे सभी शिकायतकर्ता पीड़िताओं से बदला लेंगे और ऐसी हरकतों को दोहराने की भी आशंका है। कोर्ट ने कहा, ‘आखिरकार, उन पीड़िताओं के इमोशनल और साइकोलॉजिकल नुकसान को देखना होगा जो अपनी मेडिकल पढ़ाई कर रही हैं।’

‘अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करना जरूरी’

कोर्ट ने कहा, ‘हॉस्पिटल जैसे वर्कप्लेस में सेफ्टी और महिलाओं की मॉरल व लीगल डिग्निटी को प्रोटेक्ट करने के लिए इस अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करना जरूरी है।’ देवकर के खिलाफ भोईवाडा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। अपनी याचिका में देवकर ने कहा कि उनके खिलाफ शिकायत व्यक्तिगत खुन्नस और हॉस्पिटल की अंदरूनी राजनीति का नतीजा है। कोर्ट ने अपने ऑर्डर में नोट किया कि देवकर हॉस्पिटल की इंटरनल कमिटी के मेंबर भी थे, जो प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हरासमेंट ऑफ वीमेन एट वर्कप्लेस (प्रोटेक्शन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट के तहत बनी है। कोर्ट ने कहा, ‘इस केस में एक ऐसे डॉक्टर पर 6 लोगों ने गलत व्यवहार का आरोप लगाया है जो POSH कमिटी का मेंबर हैॉ।’

‘देवकर को सस्पेंड किया गया है, टर्मिनेट नहीं’

कोर्ट ने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब देवकर के खिलाफ ऐसी शिकायत आई हो। 2021 में भी एक महिला डॉक्टर ने उनके खिलाफ ऐसी ही शिकायत दर्ज की थी। जस्टिस पाटिल ने नोट किया कि देवकर को सस्पेंड किया गया है, टर्मिनेट नहीं। कोर्ट ने कहा, ‘इसलिए, अगर वे अपने खिलाफ शुरू की गई सस्पेंशन की प्रोसीडिंग्स में सफल हो जाते हैं, तो इसकी संभावना है कि वे हॉस्पिटल में वापस आएंगे और अपनी ड्यूटी जॉइन करेंगे।’ कोर्ट ने आगे कहा कि डॉक्टरों के अलावा, अब मेडिकल स्टूडेंट्स भी देवकर के खिलाफ गलत व्यवहार की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंच रहे हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। महाराष्ट्र से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।