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महाराष्ट्र कैबिनेट मीटिंग में एंटी कन्वर्जन लॉ बिल को मंज़ूरी, जबरन धर्मांतरण करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान

 Reported By: Sachin Chaudhary Edited By: Mangal Yadav
 Published : Mar 05, 2026 05:46 pm IST,  Updated : Mar 05, 2026 05:55 pm IST

महाराष्ट्र सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों को सुलझाने के मकसद से प्रस्तावित धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून का पहला ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे। फाइल- India TV Hindi
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे। फाइल Image Source : PTI

मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को हुई अपनी कैबिनेट मीटिंग में कई ज़रूरी फ़ैसले लिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में ज़बरन धर्म बदलने से जुड़े बिल को मंज़ूरी दे दी गई है। यह बिल अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां इसे कानून बनाने का प्रोसेस शुरू होगा। बिल के मुताबिक, जो कोई भी ज़बरदस्ती किसी का धर्म बदलवाएगा तो उसे गिरफ़्तार किया जाएगा।

नए कानून के मुताबिक, जो कोई भी ज़बरदस्ती, धोखाधड़ी या लालच देकर किसी का धर्म बदलवाएगा, उस पर गैर-ज़मानती जुर्म का केस दर्ज किया जाएगा। इस कानून से अब ज़बरदस्ती धर्म बदलने के मामलों में गिरफ़्तारी हो सकेगी। साथ ही, व्यक्ति को आसानी से ज़मानत भी नहीं मिल पाएगी। कानून के सभी टेक्निकल और कानूनी पहलुओं की डिटेल्ड जानकारी जल्द ही पब्लिक की जाएगी। ताकि सभी आम नागरिकों को इसके नियमों की साफ़ जानकारी मिल सके।  

मंत्री नितेश राणे ने दी ये जानकारी

 

कैबिनेट की मीटिंग के बाद मंत्री नितेश राणे ने कहा कि महाराष्ट्र में लंबे समय से धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग की जा रही थी। कई हिंदुत्व संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए वर्षों तक आंदोलन और मोर्चे निकाले। उन्होंने बताया कि अब राज्य सरकार ने एंटी कन्वर्जन (धर्मांतरण विरोधी) बिल को कैबिनेट में मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसका जीआर जारी किया जाएगा।

जबरन धर्मांतरण करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान

नितेश राणे के अनुसार, महाराष्ट्र में जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने पर नॉन-बेलेबल अपराध के तहत गिरफ्तारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के तकनीकी पहलुओं की जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी। राणे ने दावा किया कि यह कानून मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के कानूनों से भी ज्यादा सख्त और प्रभावी होगा। 

नमाज को लेकर मुंबई हाई कोर्ट के फैसले पर नितेश राणे ने कहा कि कोर्ट के फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। जब इतनी सारी मस्जिदें हैं और नमाज के लिए जगह दी गई है, तो फिर सड़कों और एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की जरूरत क्या है। हर जगह पर जोर-जबरदस्ती करने की क्या आवश्यकता है। अगर सड़कों और एयरपोर्ट पर ही नमाज पढ़नी है तो फिर मस्जिदों की जरूरत क्या है। उन जगहों को स्कूल और अन्य संस्थानों को दे देना चाहिए। 

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