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पोर्शे कार एक्सीडेंट: पुलिस ने नाबालिग की मां को भी किया गिरफ्तार, ब्लड सैंपल बदलने का आरोप

 Reported By: Atul Singh Edited By: Amar Deep
 Published : Jun 01, 2024 08:53 am IST,  Updated : Jun 01, 2024 08:53 am IST

पुणे में पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में पुलिस ने नाबालिग की मां को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि मां के ब्लड सैंपल के साथ ही नाबालिग के ब्लड सैंपल को बदला गया था।

पोर्शे कार एक्सीडेंट मामले में नाबालिग की मां गिरफ्तार।- India TV Hindi
पोर्शे कार एक्सीडेंट मामले में नाबालिग की मां गिरफ्तार। Image Source : PTI

पुणे: पुलिस ने ‘पोर्श’ कार एक्सीडेंट मामले में नाबालिग आरोपी की मां को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस बात की पुष्टि हो गई है कि किशोर के ब्लड सैंपल उसकी मां के ब्लड सैंपल से बदले गए थे। शहर के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने शनिवार को बताया कि एक्सीडेंट की जांच में यह पता चला है कि किशोर के ब्लड सैंपल उसकी मां के ब्लड सैंपल से बदले गए थे, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने दो दिन पहले एक स्थानीय अदालत में कहा था कि किशोर के ब्लड सैंपल एक महिला के ब्लड सैंपल से बदले गए थे। 

पिता और दादा भी गिरफ्तार

बता दें कि पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई को ‘पोर्श’ कार के 17 वर्षीय चालक ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में दोनों की मौत हो गई थी। पुलिस ने दावा किया कि आरोपी नशे की हालत में कार चला रहा था। मामले के 17 वर्षीय आरोपी को एक सुधार गृह में भेज दिया गया, जबकि उसके पिता एवं रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल को परिवार के वाहन चालक का कथित तौर पर अपहरण करने और उस पर हादसे की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

अस्पताल के डॉक्टरों पर भी कार्रवाई

इससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ए ए पांडे की अदालत ने दो डॉक्टरों, डॉ. श्रीहरि हरनोर और डॉ. अजय तवारे के साथ-साथ अस्पताल के एक कर्मचारी अतुल घाटकांबले को 30 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था। ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक कर्मचारी को किशोर के ब्लड सैंपल में हेरफेर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था ताकि यह दिखाया जा सके कि दुर्घटना के समय वह नशे में नहीं था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि किशोर के पिता ने डॉक्टरों में से एक को बुलाया था और उसे नमूने बदलने के लिए कहा था, साथ ही पुलिस यह जांच करना चाहती थी कि नमूनों में हेरफेर करने के निर्देश किसने दिए थे।

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