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‘...तो मैं मंडल आयोग को चुनौती दूंगा’, भुजबल पर भड़के जरांगे का बड़ा बयान

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Feb 08, 2024 10:41 pm IST, Updated : Feb 08, 2024 10:41 pm IST

मराठा नेता मनोज जरांगे ने कहा कि अगर छगन भुजबल मराठा आरक्षण की राह में रोड़े अटकाते रहे तो हमारा धैर्य जवाब दे जाएगा और हमें मंडल आयोग को चैलेंज करना पड़ेगा।

Maratha Quota, Mandal Commission, Chhagan Bhujbal- India TV Hindi
Image Source : PTI FILE मराठा नेता मनोज जरांगे।

 

नासिक: रिजर्वेशन एक्टिविस्ट मनोज जरांगे ने गुरुवार को मराठा आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। जरांगे ने कहा कि अगर महाराष्ट्र के मंत्री और OBC नेता छगन भुजबल ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की राह में बाधाएं पैदा कीं तो वह ‘मंडल आयोग को चुनौती देंगे।’ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ‘सगे-संबंधी’ या उन लोगों के रिश्तेदारों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने के अपने आश्वासन पर अमल नहीं किया, जिन्होंने पहले से ही खुद को कुनबी समुदाय से संबंधित बताया है, तो वह 10 फरवरी से नए सिरे से भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

‘छगन भुजबल ने 3 बार समस्याएं पैदा की हैं’

जरांगे ने कहा, ‘जैसे आपके बेटे-बेटियां हैं, वैसे ही हमारे भी बेटे-बेटियां हैं। हम मंडल आयोग को चुनौती नहीं देना चाहते। आप जियो और हमें जीने दो। लेकिन अगर आपने हमारे आरक्षण की राह में बाधाएं पैदा कीं, तो हमारा धैर्य जवाब दे जाएगा और हमें मंडल आयोग को चुनौती देनी पड़ेगी।’ बता दें कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में OBC समुदायों के लिए आरक्षण करीब 3 दशक पहले मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था। जरांगे ने कहा, ‘राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और OBC नेता छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण के लिए 3 बार समस्याएं पैदा की हैं।’

जरांगे ने बताई प्रस्तावित भूख हड़ताल की वजह

जरांगे ने कहा कि भुजबल को मराठा आरक्षण की राह में रोड़े अटकाने से बचना चाहिए। भुजबल मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने की सुविधा देने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं, जो जरांगे की मांग थी। जरांगे ने कहा, ‘10 फरवरी से प्रस्तावित भूख हड़ताल ‘संगे-संबंधी’ आदेश के कार्यान्वयन के लिए है। मराठा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है।’ बता दें कि मनोज जरांगे मराठा आरक्षण के लिए लगातार जूझते रहे हैं और काफी हद तक सरकार से अपनी मांगें मनवाने में कामयाब भी रहे हैं।

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