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मिजोरम के पूर्व CM जोरामथंगा सक्रिय राजनीति से जल्द लेंगे संन्यास, बताई ये वजह

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jan 15, 2024 08:40 pm IST,  Updated : Jan 15, 2024 08:40 pm IST

मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने सक्रिय राजनीती से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेता जल्द ही एक नई व्यवस्था की घोषणा करेंगे।

मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा- India TV Hindi
मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा Image Source : FILE PHOTO

मिजोरम विधानसभा चुनाव के कुछ महीने बाद पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने सोमवार को कहा कि वो जल्द ही सक्रिय राजनीती से संन्यास लेंगे। उन्होंने राजनीती से संन्यास लेने के पीछे की वजह अपनी उम्र बताई। जोरामथंगा 80 साल के होने वाले हैं। विधानसभा में विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के अध्यक्ष जोरामथंगा ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तावंलुइया से इस बारे में चर्चा की है और हम दोनों ने फैसला लिया है कि पार्टी उनके बिना भी जारी रहनी चाहिए।

नई जिम्मेदारी नहीं देने की अपील 

आइजोल में पार्टी कार्यालय के उद्घाटन के बाद उन्होंने MNF कार्यकर्ताओं से कहा, ‘‘हमने इस मामले पर चर्चा की है और इस बात पर सहमत हुए हैं कि पार्टी हमारी मौजूदगी के बिना भी जारी रहनी चाहिए, क्योंकि हम दोनों 80 वर्ष के हो गए हैं। हमने अपनी पार्टी के नेताओं को अपनी सेवानिवृत्ति के बारे में भी सूचित कर दिया है।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेता जल्द ही एक नई व्यवस्था की घोषणा करेंगे। जोरामथंगा ने कहा कि MNF पदाधिकारियों का मौजूदा कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री और तावंलुइया ने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि उन्हें नई जिम्मेदारियां नहीं दी जाएं। 

चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार

बता दें कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद जोरामथंगा ने 5 दिसंबर को MNF अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया था। ZPM ने 7 नवंबर को हुए चुनाव में MNF को पराजित कर दिया। ZPM को मिजोरम विधानसभा की 40 में से सिर्फ 10 सीट मिली। वर्ष 1990 में लालडेंगा की मृत्यु के बाद से जोरामथंगा MNF अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं। लालडेंगा ने पार्टी की स्थापना की और 1966 से 1986 तक अलगाववादी आंदोलन का नेतृत्व किया। 

जोरामथंगा 1966 में एमएनएफ के नेतृत्व वाले भूमिगत आंदोलन में शामिल हुए और 1969 में जब संगठन ने अपना आधार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में शिफ्ट कर लिया, तो वह अध्यक्ष के सचिव बन गए। जोरामथंगा वर्ष 1979 में एमएनएफ के उपाध्यक्ष बने। वह छह बार 1987, 1989, 1993, 1998, 2003 और 2018 में विधायक चुने गए। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में तीन कार्यकाल (वर्ष 1998 से 2008 और 2018 से 2023) पूरे किए। 

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