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मिजोरम में लाइ स्वायत्त परिषद पर शासन करेगा कांग्रेस-एमएनएफ गठबंधन, इस नेता को यूएलपी बनाने की तैयारी

मिजोरम में लाइ स्वायत्त परिषद के लिए कांग्रेस और एमएनएफ ने गठबंधन किया है। कांग्रेस के पास एक मात्र सदस्य सी.लालमुअनथंगा हैं।

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
Published : May 01, 2024 09:59 pm IST, Updated : May 01, 2024 10:04 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : FILE-ANI सांकेतिक तस्वीर

आइजोलः मिजोरम की लाइ स्वायत्त जिला परिषद (एलएडीसी) में लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध के बाद, अधिकारियों ने बुधवार को 25 सदस्यीय परिषद के संचालन के लिए कांग्रेस-एमएनएफ के बीच गठबंधन होने की घोषणा की। एलएडीसी राज्य के दक्षिणी भाग में लाइ लोगों के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत गठित तीन स्वायत्त जिला परिषदों में से एक है, जिसका मुख्यालय लॉन्ग्तलाई है।

राज्यपाल के पास पेश किया दावा

अधिकारियों ने कहा कि एमएनएफ के 12 सदस्यों ने कांग्रेस के एकमात्र सदस्य सी.लालमुअनथंगा को साथ लेकर संयुक्त विधायी दल (यूएलपी) बनाया है। इस नवगठित गठबंधन ने परिषद को चलाने के लिए राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति के समक्ष अपना दावा पेश किया है। अधिकारियों ने कहा कि लालमुअनथंगा को परिषद का मुख्य कार्यकारी सदस्य (सीईएम) बनाए जाने की उम्मीद है।

वी.जिरसांगा ने मार्च में दिया था इस्तीफा

भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने पर सीईएम वी.जिरसांगा के इस्तीफे के बाद मार्च में एलएडीसी को राज्यपाल शासन के तहत रखा गया था, जिसपर पहले एमएनएफ का शासन था। फरवरी में, आइजोल की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने परिषद के कार्यकारी सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 1.33 करोड़ रुपये की हेरफेरी करने के लिए जिरसंगा को चार साल की कैद की सजा सुनाई थी और 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

एमएनएफ के आठ सदस्यों ने छोड़ दी थी पार्टी

इसके तुरंत बाद एमएनएफ के आठ सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी और विपक्ष के साथ गठबंधन कर लिया और जिरसंगा के नेतृत्व वाली परिषद में विश्वास की कमी व्यक्त करते हुए राज्यपाल को एक शिकायत सौंपी। सीईएम के इस्तीफे के बाद, एमएनएफ के आठ सदस्यों में से एक जिरसंगा के खेमे में लौट आया, जिससे ऐसी स्थिति बन गई कि कोई भी पार्टी परिषद को चलाने के लिए बहुमत हासिल नहीं कर सकी क्योंकि अध्यक्ष को छोड़कर, सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों खेमों में 12-12 सदस्य थे। इसके बाद, राज्यपाल शासन लागू किया गया और लॉन्ग्तलाई के डीसी को परिषद का कार्यवाहक नियुक्त किया गया।

इनपुट-भाषा 

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