नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को एक जनहित याचिका दायर की गई। इसमें कॉल-ड्रॉप पर मौजूदा कानून को लागू करने की अपील की गई है। इसके अलावा इसमें यह भी अपील की गई है कि यदि बात करते-करते कॉल बीच में कटती है तो पूरी राशि माफ की जाए। गौरतलब है कि सरकार ने कॉल-ड्रॉप होने पर टेलिकॉम ऑपरेटरों 1 जनवरी से हर्जाना का नियम बनाया था, लेकिन यह अभी तक लागू नहीं हो पाया है।
11 जनवरी को याचिका पर होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति बी डी अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया गया। उन्होंने रजिस्ट्री को इस मामले को मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी की अदालत में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ टेलीकॉम ऑपरेटरों के ट्राई के नियमन के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रही है। पीठ ने इस जनहित याचिका को 11 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
एनजीओ ने दायर की याचिका
एनजीओ मौलिक भारत ट्रस्ट की याचिका में आरोप लगाया गया है कि दूरसंचार नियामक कॉल ड्रॉप की बढ़ती संख्या के बावजूद दूरसंचार ऑपरेटरों पर कार्रवाई करने में विफल रहा है। एनजीओ का कहना है कि कॉल-ड्रॉप लगातार हो रहे हैं, लेकिन कंपनी इसकी भरपाई नहीं कर रही है। गौरतलब है कि सरकार ने डॉल-ड्रॉप पर टेलीकॉम कंपनियों को हर्जाना देने को कहा था, जो कि अभी तक लागू नहीं हो पाया है।