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सरकारी बैंकों का बढ़ता NPA बना सरकार के गले की फांस, मंगलवार को संसदीय समिति के सामने होंगे 11 बैंकों के प्रमुख

 Edited By: Manish Mishra
 Published : Jun 24, 2018 12:49 pm IST,  Updated : Jun 24, 2018 12:49 pm IST

सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों के प्रमुख अगले सप्ताह एक संसदीय समिति के समक्ष हाजिर होंगे और बढ़ते फंसे कर्ज (NPA) तथा धोखाधड़ी के मामलों से उसे अवगत करवाएंगे। सूत्रों ने बताया कि वित्त पर संसद की स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को होगी।

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नई दिल्ली सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों के प्रमुख अगले सप्ताह एक संसदीय समिति के समक्ष हाजिर होंगे और बढ़ते फंसे कर्ज (NPA) तथा धोखाधड़ी के मामलों से उसे अवगत करवाएंगे। सूत्रों ने बताया कि वित्त पर संसद की स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को होगी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली यह समिति ‘देश के बैंकिंग क्षेत्र और बैंकों के सामने एनपीए सहित अन्य दिक्कतों’ के मुद्दों पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, देना बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कारपोरेशन बैंक व इलाहाबाद बैंक के आला अधिकारी 26 जून को इस समिति के समक्ष पेश होंगे तथा सवालों का जवाब देंगे।

देश का बैंकिंग क्षेत्र इस समय बढ़ती गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की समस्या का सामना कर रहा है जो कि दिसंबर 2017 के आखिर में कुल अग्रिमों का 8.99 लाख करोड़ रुपए या 10.11 प्रतिशत हो गईं। इस कुल सकल NPA में सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों का हिस्सा 7.77 लाख करोड़ रुपए का है। इसी तरह धोखाधड़ी के बढ़ते मामले भी बैंकिंग क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।

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