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अप्रैल 2020 से हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खुले, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने जारी किए आंकड़े

घरेलू शेयर बाजार के नए शिखर पर पहुंचने के साथ वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान ब्रोकरेज कंपनियों ने पिछले साल अप्रैल से 31 मई 2021 तक हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: June 06, 2021 23:33 IST
अप्रैल 2020 से हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खुले, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने जारी किए आंकड़े- India TV Paisa
Photo:FILE

अप्रैल 2020 से हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खुले, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने जारी किए आंकड़े

मुंबई: घरेलू शेयर बाजार के नए शिखर पर पहुंचने के साथ वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान ब्रोकरेज कंपनियों ने पिछले साल अप्रैल से 31 मई 2021 तक हर महीने औसतन 13 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2021 तक बाजार में खुदरा निवेशकों की कुल संख्या 6.97 करोड़ हो गई है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पिछले वर्ष मार्च में कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित करने के बाद शेयर बाजार में एक महीने के अंदर 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। जिसके बाद बाजार जून में पुन: तेजी में लौट आया था। बीएसई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने पीटीआई-भाषा से कहा कि ब्रोकरेज कंपनियों और शेयर बाजारों ने पिछले 14 महीनों के दौरान हर महीने 12 से 15 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं। इनमे से चालीस प्रतिशत डिमैट खाते बीएसई से जुड़ी ब्रोकरेज कंपनियों द्वारा खोले गए। 

उन्होंने कहा, ‘‘बीएसई ने पिछले 15 महीनों में सभी सदस्यों के लिए कुल मिलाकर लगभग 40 प्रतिशत अधिक निवेशक खाते जोड़े हैं। निवेशकों के खातों में बढोत्तरी दर्शाता है कि ऑटोमेशन और मोबाइल ट्रेडिंग से स्टॉक और म्यूचुअल फंड में निवेश देश के हर हिस्से में पंहुच गया है।’’ बीएसई के अनुसार 31 मई तक देश में कुल 6.9 करोड़ डीमेट खाते थे। जिसमें से 25 प्रतिशत खाते महाराष्ट्र से जबकि 85.9 खाते गुजरात से हैं। 

गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश से 52.3 लाख , तमिलनाडु 42.3 लाख और कर्नाटक से 42.2 लाख का नंबर है। इसके अलावा बंगाल से 39.5 लाख, दिल्ली से 37.3 लाख, आंध्र प्रदेश से 36 लाख, राजस्थान से 34.6 लाख, मध्य प्रदेश से 25.7 लाख, हरियाणा से 21.2 लाख, तेलंगन से 20.7 लाख, केरल से 19.4 लाख, पंजाब से 15.2 लाख और बिहार से 16.5 लाख डीमेट खाते हैं। सेबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक साल से अधिक समय के लिए उपयोग नहीं किये जाने वाले डीमेट खातों को असक्रिय माना जाता है। 

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