नई दिल्ली। कभी मनरेगा के प्रभाव पर सवाल उठाने वाली एनडीए सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 में इस योजना के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है। इस साल बजट में मनरेगा के लिए 3,800 करोड़ रुपए बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट में ग्रामीण विकास की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि 2016-17 में मनरेगा के लिए 38,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। यदि पूरी राशि खर्च हो जाती है, तो यह मनरेगा में अब तक सबसे बड़ा बजट खर्च होगा।
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सरकार ने इससे पिछले वित्त वर्ष के बजट में मनरेगा के लिए 34,699 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया था। इसके अलावा सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इस कोष के वास्तविक इस्तेमाल के आधार पर 5,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध कराने का वादा किया था। सरकार को अपने वादे की याद दिलाते हुए ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने जेटली को पिछले साल 30 दिसंबर को पत्र लिखकर यदि योजना में वादे के अनुरूप 5,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो इस वित्त वर्ष में इसमें 5,000 करोड़ रुपए की कमी होगी।
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budget 2016-17
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मनरेगा के लिए 2014-15 में आरंभिक बजटीय आवंटन 34,000 करोड़ रुपए था। संशोधित बजट में इसे घटाकर 31,000 करोड़ रुपए कर दिया गया। इस साल दो फरवरी को मनरेगा कार्यक्रम के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में राजग सरकार ने कहा था कि उसने संप्रग की इस योजना को रिकॉर्ड धन उपलब्ध करा कर इसको नया रूप दिया है।