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मुफ्त अनाज वितरण को मंत्रिमंडल से औपचारिक मंजूरी, मई और जून में मिलेगा फायदा

कोविड ​​-19 के दूसरी लहर के मद्देनजर, खाद्य मंत्रालय ने इस योजना को एक मई, 2021 से दो महीने के लिए फिर लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसे बुधवार को मंजूरी देने की औपचारिकता पूरी की।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: May 05, 2021 17:41 IST
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Photo:PTI

मुफ्त अनाज योजना को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत मई-जून की अवधि के दौरान लगभग 80 करोड़ पीडीएस लाभार्थियों को प्रति माह पांच किग्रा मुफ्त अनाज वितरित किए जाने के कार्यक्रम को मंजूरी दी। यह योजना पहले ही प्रभाव में आ चुकी है। पीएमजीकेवाई को पहले वर्ष 2020 में जुलाई तक के तीन महीने के लिए घोषित किया गया था। गरीबों पर कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए शुरू की गयीइस योजना को बाद में नवंबर,2020 तक आगे बढ़ा दिया गया था। कोविड ​​-19 के दूसरी लहर के मद्देनजर, खाद्य मंत्रालय ने इस योजना को एक मई, 2021 से दो महीने के लिए फिर लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसे बुधवार को मंजूरी देने की औपचारिकता पूरी की। 

सरकार ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसे विगत में लागू किए जाने की तिथि से मंजूरी प्रदान की गई। पीएमजीकेएवाई-III के तहत अतिरिक्त खाद्यान्न के आवंटन के लिए यह दो महीने की अवधि - मई से जून 2021 तक होगा।’’ इसमें कहा गया है कि इस योजना के तहत, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आने वाले लगभग 79.88 करोड़ लाभार्थियों को, प्रति माह प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम अनाज मुफ्त में दिया जाएगा। इसमें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के तहत आने वाले लोग भी शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि इसमें खाद्यान्नों की कुल खपत लगभग 80 लाख टन हो सकती है और इस पर 25,332.92 करोड़ रुपये की अनुमानित खाद्य सब्सिडी देनी पड़ सकती है। 

सरकार के अनुसार, ‘‘यह अतिरिक्त आवंटन, कोरोना वायरस की वजह से उत्पन्न आर्थिक दिक्कतों के कारण गरीबों को होने वाली कठिनाइयों का निवारण करेगा।’’ सरकार का कहना है कि इससे इस अवधि में अनाज के कारण किसी गरीब को तकलीफ नहीं होगी। पीएमजीकेएवाई के तहत राज्यों को खाद्यान्न का आवंटन खाद्य मंत्रालय द्वारा एनएफएसए के तहत मौजूदा आवंटन-अनुपात के आधार पर किया जाएगा। 

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