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नगदी संकट का खर्च पर पड़ा सीधा असर, जनवरी-मार्च तिमाही में वृद्धि पड़ी धीमी

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Jun 20, 2017 03:56 pm IST,  Updated : Jun 20, 2017 03:56 pm IST

गत वर्ष नवंबर में 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने का खर्च पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा, जिसकी वजह से जनवरी-मार्च तिमाही की वृद्धि धीमी पड़ी।

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नगदी संकट का खर्च पर पड़ा सीधा असर, जनवरी-मार्च तिमाही में वृद्धि पड़ी धीमी

नई दिल्ली। गत वर्ष नवंबर में 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाने का खर्च पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा, जिसकी वजह से जनवरी-मार्च तिमाही की वृद्धि धीमी पड़ी। फिच रेटिंग्स ने चेतावनी देते हुए कहा कि मौजूदा निवेश में कमी का असर वृद्धि के आंकड़ों पर पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग में कमी देखी गई है क्योंकि नवंबर में सरकार ने मुद्रा का 86 प्रतिशत हिस्‍सा वापस ले लिया था, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव खर्च पर दिखा। फिच ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का प्रभाव काफी परेशान करने वाला है। यह आंशिक तौर पर अर्थव्यवस्था के बड़े असंगठित हिस्से के व्यय करने की चुनौतियों को प्रतिबिंबित करता है। उपभोग की वृद्धि दर भी 2016-17 की चौथी तिमाही में गिरकर 7.3 प्रतिशत रही, जो 2015-16 की समान अवधि में 11.3 प्रतिशत थी।

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