नई दिल्ली। देश को लैस-कैश इकोनॉमी बनाने में भले ही आम लोग ज्यादा रुचि न दिखा रहे हों, लेकिन मोदी सरकार अपनी इस मुहिम में हार मानती हुई नहीं दिख रही है। खबर है कि केंद्र सरकार डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों को और भी आकर्षित करने के लिए कैशबैक प्रदान करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत यदि ग्राहक डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए किसी भी वस्तु का मूल्य चुकाता है है तो व्यापारियों को इस पर कैशबैक की सुविधा मिल सकती है। वहीं अधिकतम खुदार मूल्य पर भी ग्राहकों को एमआरपी पर छूट मिल सकती है।
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समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक राजस्व विभाग एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके तहत जो लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हैं तो सरकार उन्हें वस्तु की एमआरपी पर छूट ( डिस्काउंट ) दे सकती है। इस योजना के तहत ग्राहकों को अधिकतम 100 रूपए तक की छूट मिल सकती है। वहीं अपनी दुकान पर पीओएस मशीन लगाने के लिए व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए सरकार उन्हें कैशबैक उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रही है। यह कैशबैक उन्हें डिजिटल भुगतान पर ही प्राप्त होगा।
राजस्व विभाग का यह प्रस्ताव चार मई को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में रखा जा सकता है। इस परिषद में सभी राज्यों के वित्तमंत्री शामिल हैं और वित्तमंत्री अरुण जेटली इसके अध्यक्ष हैं। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग के इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई बैठक में विचार-विमर्श किया जा चुका है। इस बैठक में व्यापारियों के लिए कैशबैक के अलावा टैक्स क्रेडिट के विकल्प पर भी विचार किया गया, लेकिन राजस्व विभाग ने कैशबैक के विकल्प को चुना, क्योंकि इसे लागू करना आसान है।