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अमेरिका में बोले राजन, अंधों में काना राजा सरीखी है भारतीय अर्थव्यवस्था

एक अमेरिकी पत्रिका को दिए इंटरव्‍यू में राजन ने कहा कि विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था में भारत की हालत कुछ कुछ अंधों में काना राजा जैसी है।

Sachin Chaturvedi @sachinbakul
Published : Apr 16, 2016 04:21 pm IST, Updated : Apr 16, 2016 04:21 pm IST
Seedhi Baat: अमेरिका में बोले राजन, अंधों में काना राजा सरीखी है भारतीय अर्थव्यवस्था- India TV Paisa
Seedhi Baat: अमेरिका में बोले राजन, अंधों में काना राजा सरीखी है भारतीय अर्थव्यवस्था

नई दिल्‍ली। दुनिया भले ही भारत को वैश्विक अर्थव्यस्था में चमकता बिंदु माने, लेकिन इस बारे में आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन की राय बिल्‍कुल अलग है। एक अमेरिकी पत्रिका को दिए इंटरव्‍यू में राजन ने कहा कि विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था में भारत की हालत कुछ कुछ अंधों में काना राजा जैसी है। हाल ही में आईएमएफ सहित विभिन्न संस्थानों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक वृद्धि के लिहाज से चमकते बिंदुओं में से एक करार दिया है। राजन की अगुवाई में रिजर्व बैंक को भी इस बात का श्रेय दिया जाता है कि उसने देश की वित्तीय प्रणाली को बाहरी झटकों से बचाने के लिए उचित कदम उठाए हैं। राजन विश्व बैंक व आईएमएफ की सालाना बैठक के साथ साथ जी20 के वित्तमंत्रियों व केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भाग लेने अमेरिका आए हैं।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री और आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने से जब चमकते बिंदु वाले इस सिद्धांत पर उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हमें अब भी वह स्थान हासिल करना है जहां हम संतुष्ट हो सकें। हमारे यहां लोकोक्ति है, अंधों में काना राजा। हम थोड़ा बहुत वैसे ही हैं। डाउ जोंस एंड कंपनी द्वारा प्रकाशित पत्रिका मार्केटवाच को एक साक्षात्कार में राजन ने कहा, हमारा मानना है कि हम उस मोड़ की ओर बढ़ रहे हैं जहां हम अपनी मध्यावधि वृद्धि लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं क्योंकि हालात ठीक हो रहे हैं।

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साक्षात्कार में उन्होंने चालू खाते व राजकोषीय घाटे जैसे मोर्चे पर उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है जिससे ब्याज दरों में गिरावट की गुंजाइश बनी हे। उन्होंने कहा, निसंदेह रूप से, ढांचागत सुधार चल रहे हैं। सरकार नयी दिवाला संहिता लाने की प्रक्रिया में है। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) आना है। लेकिन अनेक उत्साहजनक चीजें पहले ही घटित हो रही हैं।

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