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क्या ₹500 के नोटों की सप्लाई सरकार करने जा रही है बंद? वित्त राज्य मंत्री ने संसद में दी ये अहम जानकारी

 Published : Aug 05, 2025 07:57 pm IST,  Updated : Aug 05, 2025 07:57 pm IST

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में ₹500 के नोटों को लेकर सरकार की बात रखी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रिप्टो एसेट्स पर फिलहाल कोई विधिक नियंत्रण नहीं है।

500 रुपये के नोट गिनता एक शख्स।- India TV Hindi
500 रुपये के नोट गिनता एक शख्स। Image Source : FREEPIK

केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि ₹500 के बैंकनोट की सप्लाई को बंद करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। संसद में यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दी। पीटीआई की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा कि एटीएम से ₹500 के नोटों का डिस्ट्रीब्यूशन पहले की ही तरह जारी रहेगा। इसके अलावा, ₹100 और ₹200 मूल्यवर्ग के नोटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। 

राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 28 अप्रैल, 2025 को एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें सभी बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने एटीएम में नियमित रूप से ₹100 और ₹200 के नोट डालना सुनिश्चित करें, जिससे आम जनता को छोटे मूल्यवर्ग की नकदी आसानी से मिल सके।

₹100 या ₹200 के नोट मिलने पर जोर

खबर के मुताबिक, आरबीआई के गाइडलाइंस में कहा गया है कि 30 सितंबर, 2025 तक देश के 75% एटीएम से कम से कम एक कैसेट के ज़रिए ₹100 या ₹200 के नोट मिलने चाहिए। यह लक्ष्य 31 मार्च, 2026 तक 90% एटीएम तक बढ़ाया जाएगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में चौधरी ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पिछले पांच वर्षों (अप्रैल 2020 से मार्च 2025) के दौरान 76 मामलों की जांच की है। इन मामलों से ₹949.43 करोड़ की disgorgement राशि वसूली गई है। यहां बता दें, Disgorgement वह प्रक्रिया है जिसमें अवैध रूप से प्राप्त लाभ को जब्त किया जाता है। राज्य मंत्री ने कहा कि निवेश संबंधी धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई केंद्रीय एजेंसियां और प्रवर्तन निकाय सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

ऐसे लगभग 220 मामलों की जांच शुरू

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी पिछले पांच सालों में मल्टी लेवल मार्केटिंग घोटालों से जुड़े 9 मामलों की पहचान की है। प्रवर्तन निदेशालय (ई़डी) ने 1 जनवरी, 2020 से 30 जुलाई, 2025 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत लगभग 220 मामलों की जांच शुरू की है, जो निवेश धोखाधड़ी से संबंधित हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रिप्टो एसेट्स पर फिलहाल कोई विधिक नियंत्रण नहीं है, लेकिन RBI-SACHET पोर्टल पर अनधिकृत निवेश योजनाओं को लेकर हजारों शिकायतें मिल रही हैं।

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