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बजट से पहले सिगरेट पीना आज से हुआ महंगा, इस वजह से बढ़े दाम, जानें कितना ज्यादा चुकाना होगा

 Published : Feb 01, 2026 08:43 am IST,  Updated : Feb 01, 2026 08:43 am IST

सरकार ने दरअसल आज से नया एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू कर दिया है। यह बदलाव आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालेगा। खासकर नियमित धूम्रपान करने वालों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

पहले सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 28% GST + कंपेंसेशन सेस लगता था।- India TV Hindi
पहले सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 28% GST + कंपेंसेशन सेस लगता था। Image Source : PIXABAY

1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पाद महंगे हो गए हैं। केंद्र सरकार ने इन पर नया एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू कर दिया है। इससे धूम्रपान करने वालों की जेब पर अब ज्यादा भार आ गया है। यह बदलाव पिछले लगभग 7 सालों में सिगरेट पर सबसे बड़ी कर वृद्धि है। सरकार के इस फैसले का मकसद भारत की तम्बाकू टैक्स व्यवस्था को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के करीब लाना है, जहां सिगरेट पर कुल टैक्स बोझ रिटेल मूल्य का कम से कम 75% होना चाहिए। 

1 फरवरी से जानें क्या बदला?

पहले सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 28% GST + कंपेंसेशन सेस लगता था। अब यह बदलकर अधिकतम 40% GST + अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक) + संबंधित सेस हो गया है।

कंपेंसेशन सेस को हटाकर नई व्यवस्था लागू की गई है।

सिगरेट कितनी महंगी हुईं? (प्रति स्टिक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी)

सिगरेट की लंबाई और प्रकार के आधार पर अतिरिक्त टैक्स अलग-अलग है:
65 mm तक की बिना फिल्टर वाली छोटी सिगरेट: लगभग ₹2.05 प्रति स्टिक
65 mm तक की फिल्टर वाली सिगरेट: लगभग ₹2.10 प्रति स्टिक
65 से 70 mm वाली सिगरेट: ₹3.60 से ₹4 प्रति स्टिक
70 से 75 mm वाली लंबी/प्रीमियम सिगरेट: लगभग ₹5.40 प्रति स्टिक
गैर-मानक या विशेष डिजाइन वाली सिगरेट: अधिकतम ₹8.50 प्रति स्टिक (ज्यादातर लोकप्रिय ब्रांड इस श्रेणी में नहीं आते, इसलिए इन पर भारी बढ़ोतरी सीमित रहेगी)

पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नए नियम

चबाने वाला तंबाकू, खैनी, जर्दा, गुटखा आदि के लिए अब MRP आधारित मूल्यांकन लागू हो गया है। जीएसटी अब निर्माण लागत के बजाय पैकेट पर छपी खुदरा कीमत (एमआरपी) के आधार पर लगेगा। पान मसाला पर हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस उत्पादन क्षमता के आधार पर लगाया जाएगा, जिससे कुल टैक्स बोझ (जीएसटी सहित) 88% तक पहुंच सकता है।  चबाने वाला तंबाकू और जर्दायुक्त सुगंधित तंबाकू पर 82% एक्साइज ड्यूटी
और गुटखा पर 91% एक्साइज ड्यूटी लागू है। 

पान मसाला निर्माताओं के लिए सख्त नियम

नए हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस कानून के तहत ताजा रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य। सभी पैकिंग मशीनों पर CCTV कैमरे लगाने होंगे, फुटेज कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। मशीनों की संख्या, क्षमता की जानकारी एक्साइज अधिकारियों को देनी होगी। अगर कोई मशीन 15 दिन या इससे ज्यादा बंद रहे, तो ड्यूटी में छूट का दावा किया जा सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस टैक्स बढ़ोतरी से अगले वित्त वर्ष में घरेलू सिगरेट उद्योग की बिक्री मात्रा में 6 से 8 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इससे तस्करी बढ़ने का भी खतरा है, लेकिन सरकार का फोकस स्वास्थ्य सुरक्षा और राजस्व बढ़ाने पर है। 

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