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कोयले से गैस बनाएगी सरकारी कंपनी, उद्योगों को सस्ते रेट पर उपलब्ध कराई जाएगी सिनगैस

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 24, 2026 04:43 pm IST,  Updated : May 24, 2026 04:43 pm IST

देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठा दिए हैं।

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गैस प्लांट (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : AFP

सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच कोयले से सिनगैस बनाने की तैयारी कर रही है। कोल इंडिया, इसके लिए सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करेगी। सिनगैस आमतौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका इस्तेमाल बिजली, खाद और ईंधन बनाने में होता है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी इन सिनगैस प्लांट को कोयला खदानों के पास (पिटहेड) लगाएगी या उर्वरक संयंत्रों, गैस से चलने वाले बिजलीघरों और डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन (DRI) यूनिट्स जैसे इंडस्ट्रियल कंज्यूमर के आसपास स्थापित करेगी। 

देश के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी

देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठा दिए हैं। ये पहल राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और रसायन तथा कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी सिनगैस प्लांटों को बनाओ-स्वामित्व रखो-चलाओ (BOO) या बनाओ-चलाओ-देखरेख करो (BOM) मॉडल पर डेवलप करने की योजना बना रही है। इन प्रोजेक्ट्स में डेवलपर या गठजोड़ कोयले से सिनगैस का उत्पादन करेंगे। 

संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए EOI जारी

सिनगैस का इस्तेमाल स्वच्छ ईंधन, उर्वरक, रसायन और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। कोल इंडिया ने संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए EOI भी जारी किए हैं। इसके तहत कंपनी ने दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं। पहले मॉडल के तहत, कोल इंडिया की खदानों के क्षेत्रों में सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जहां से आसपास के औद्योगिक संकुलों को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए गैस की सप्लाई होगी। इसका उद्देश्य कोयले के परिवहन पर आने वाली लागत को कम करना और उद्योगों को सस्ते रेट पर सिनगैस उपलब्ध कराना है। 

दूसरे मॉडल के तहत क्या है प्लानिंग

दूसरे मॉडल में सिनगैस उत्पादन इकाइयों को किसी गैस से चलने वाले बिजलीघर, डीआरआई प्लांट, उर्वरक इकाई या बड़े इंडस्ट्रियल कंज्यूमर के नजदीक स्थापित किया जाएगा। इससे संचालन दक्षता और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से अंतिम उपभोक्ता को निर्बाध सिनगैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। कोल इंडिया संभावित औद्योगिक ग्राहकों की भी तलाश कर रही है, जो दीर्घकालिक समझौतों के तहत सिनगैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग कर सकें। इसके लिए कंपनी ने बाजार की रुचि, आपूर्ति मॉडल और व्यावसायिक अपेक्षाओं का आकलन करने को अलग से ईओआई जारी किया है।

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