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1 साल तक सोना नहीं खरीदेंगे सरकारी अधिकारी, जानें विदेशी मुद्रा बचाने की मुहिम में क्या-क्या हो रहे उपाय

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 19, 2026 07:57 am IST,  Updated : May 19, 2026 07:57 am IST

बिजली और ईंधन की बचत, वर्चुअल कामकाज और सरकारी खर्च घटाने को लेकर भी कई कदम उठाए गए हैं।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

विदेशी मुद्रा बचाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर हरसंभव उपाय किए जा रहे हैं। कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के मितव्ययिता और विदेशी मुद्रा बचत के आह्वान के समर्थन में एक साल तक (शादी-विवाह जैसे विशेष अवसरों को छोड़कर) सोना नहीं खरीदने का स्वैच्छिक फैसला लिया है। सोमवार को एक आधिकारिक बयान में ये जानकारी दी गई। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये फैसला प्रधानमंत्री मोदी के 'संयम, संसाधन संरक्षण और आत्मनिर्भरता' के आह्वान को प्रशासनिक स्वरूप देने की दिशा में लिया गया है। 

हफ्ते में एक दिन कार-पूल करेंगे कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारी

बयान के मुताबिक, दोनों मंत्रालयों में बिजली और ईंधन की बचत, वर्चुअल कामकाज और सरकारी खर्च घटाने को लेकर भी कई कदम उठाए गए हैं। इसमें कार्यालयों में अनावश्यक बिजली उपकरणों को बंद रखने, 20 प्रतिशत कर्मचारियों को बारी-बारी 'वर्क फ्रॉम होम' देने और कार-पूलिंग लागू करने जैसे उपाय शामिल हैं। इस फैसले के तहत दोनों मंत्रालयों के अधिकारी अब हफ्ते में एक दिन कार-पूलिंग करेंगे और गाड़ियों के इस्तेमाल में लगभग 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, आधिकारिक यात्राओं और बैठकों को जरूरत पर आधारित बनाया जाएगा तथा संभव होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कामकाज किया जाएगा।

बेटी की शादी और अन्य पारिवारिक अवसरों के लिए मिलेगी छूट

कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के बयान में कहा गया है कि अधिकारियों ने सामूहिक रूप से फैसला लिया है कि अगले एक साल तक वे सोना नहीं खरीदेंगे, हालांकि बेटी की शादी या विशेष पारिवारिक अवसरों पर इसमें छूट दी जाएगी। इसे एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि स्वैच्छिक सामाजिक-नैतिक संकल्प बताया गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस फैसले को प्रधानमंत्री के आह्वान पर गंभीर प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत संयम का उदाहरण बताया। उन्होंने मंत्रालयों में ऊर्जा संरक्षण पर भी जोर दिया।

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