नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत परीक्षण के लिए हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों का उपयोग करने को लेकर पांच पायलट प्रोजेक्ट शुरू किये हैं। देशभर में पायलट प्रोजेक्ट्स के तहत परीक्षण के लिए बसों और ट्रकों सहित 37 हाइड्रोजन-फ्यूल वाले वाहनों का उपयोग किया जाएगा। मंत्रालय ने बयान में कहा कि ये वाहन देशभर में 10 अलग-अलग मार्गों पर चलेंगे। बयान के अनुसार, उपरोक्त प्रोजेक्ट्स टाटा मोटर्स लि., रिलायंस इंडस्ट्रीज लि., एनटीपीसी, एएनईआरटी, अशोक लेलैंड, एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल जैसी प्रमुख कंपनियों को दिये गए हैं।
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के हिस्से के रूप में सरकार ने बसों और ट्रकों में हाइड्रोजन का उपयोग करने के लिए पांच पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किये हैं। इससे पहले, मंत्रालय ने इस मिशन के तहत परिवहन क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। मंत्रालय ने कहा कि उसके अनुसार विभिन्न प्रकार के हाइड्रोजन-आधारित वाहनों, मार्गों और हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशनों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। विस्तृत जांच के बाद, कुल 37 वाहनों (बसों और ट्रकों) और नौ हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन से जुड़े पांच पायलट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गयी है।
क्रेंद से 208 करोड़ रुपये की सहायता
उपलब्ध कराई गई चयनित परियोजनाओं के लिए केंद्र से कुल वित्तीय सहायता लगभग 208 करोड़ रुपये होगी। इन पायलट प्रोजेक्ट्स के अगले 18 से 24 महीनों में चालू होने की संभावना है। इससे देश में ऐसी टेक्नोलॉजीज को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का रास्ता साफ होगा। मिशन का एक उद्देश्य पायलट आधार पर चरणबद्ध तरीके से बसों और ट्रकों में ईंधन के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन उपयोग को बढ़ावा देना है।
(पीटीआई/भाषा)