वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कीमती धातुओं की ऊंची कीमतों के कारण अप्रैल-फरवरी 2025-26 यानी 11 महीनों में देश का सोने का आयात 28.73 प्रतिशत बढ़कर 69 अरब डॉलर हो गया है। वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में सोने का आयात 53.52 अरब डॉलर रहा था। आंकड़ों के मुताबिक सोने के आयात में इस उछाल ने देश के व्यापार घाटे (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) को बढ़ाकर 310.60 अरब डॉलर कर दिया है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ये 261.80 अरब डॉलर था। भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से ज्यादा) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है।
देश के कुल आयात में 5 प्रतिशत से ज्यादा है सोने की हिस्सेदारी
देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से ज्यादा है। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान स्विट्जरलैंड से होने वाला कुल आयात 11.57 प्रतिशत बढ़कर 23.5 अरब डॉलर रहा। फरवरी में स्विट्जरलैंड से सोने का आयात सालाना आधार पर 719.30 प्रतिशत बढ़कर 2.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है। ये इंपोर्ट मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है। सोने के बढ़ते आयात का सीधा असर भारत के चालू खाता घाटे (सीएडी) पर पड़ता है।
दिल्ली में 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम है सोने का भाव
बताते चलें कि पिछले हफ्ते गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,500 रुपये (2.26 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। गुरुवार के बाद शुक्रवार को गुड फ्राइडे के मौके पर सर्राफा बाजार की छुट्टी थी और फिर शनिवार-रविवार को भी बाजार बंद थे। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का सिलसिला लगातार जारी है। तनाव की वजह से सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतें भी काफी प्रभावित हो रही हैं। गुरुवार को चांदी की कीमत में 9,000 रुपये (3.66 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई थी।