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भारत में 13 सितंबर तक कैसी रही बारिश, महंगाई से राहत मिलने को लेकर मिले ये संकेत

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा 'इंडियन रेनफॉल ट्रैकर’के मुताबिक, समग्र बुवाई लगभग पूरी हो जाने के साथ, अब ध्यान कटाई के मौसम पर केंद्रित होगा।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Sep 16, 2024 02:29 pm IST, Updated : Sep 16, 2024 02:29 pm IST
फसल आने तक बाजारों में अधिक आपूर्ति आने तक कीमतें के मौजूदा स्तरों पर स्थिर रहने की उम्मीद है।- India TV Paisa
Photo:REUTERS फसल आने तक बाजारों में अधिक आपूर्ति आने तक कीमतें के मौजूदा स्तरों पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

भारत में दीर्घावधि औसत (13 सितंबर तक) से ऊपर कुल वर्षा में 8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, क्योंकि सब्जियों और दूध की औसत खुदरा कीमतों में गिरावट आई है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। संचयी साप्ताहिक वर्षा दीर्घावधि औसत (11 सितंबर तक) से 14 प्रतिशत अधिक थी। IANS की खबर के मुताबिक, एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा 'इंडियन रेनफॉल ट्रैकर’के मुताबिक, समग्र बुवाई लगभग पूरी हो जाने के साथ, अब ध्यान कटाई के मौसम पर केंद्रित होगा। बुवाई के तहत कुल क्षेत्रफल (109.2 मिलियन हेक्टेयर) पिछले वर्ष (6 सितंबर तक) की तुलना में (सालाना आधार पर 2 प्रतिशत) अधिक है।

बुवाई का रकबा सामान्य बुवाई के रकबे का 99 प्रतिशत

खबर के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मुख्य कारण अधिकांश प्रमुख खाद्य फसलों - चावल (41.0 मिलियन हेक्टेयर), दालें (12.6 मिलियन हेक्टेयर), मोटे अनाज (18.9 मिलियन हेक्टेयर) और तिलहन (19.2 मिलियन हेक्टेयर) की अच्छी बुवाई है। कुल मिलाकर बुवाई का रकबा सामान्य बुवाई के रकबे का 99 प्रतिशत है, जबकि 2023 में इसी समय यह 98 प्रतिशत होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा सप्लाई के कारण हाल के सप्ताहों में कीमतों में नरमी आई है, लेकिन फसल आने तक बाजारों में अधिक आपूर्ति आने तक मौजूदा स्तरों पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई

कुल मिलाकर बेसिन-वार जलाशय स्तर स्वस्थ स्थिति में हैं और दीर्घकालिक औसत और पिछले वर्ष के स्तरों से ऊपर हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता के कहती हैं कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है, जिसका अर्थ जलाशय भंडारण में सुधार भी है। खरीफ की बुवाई में पिछले वर्ष की तुलना में 2.2 प्रतिशत अधिक रकबे के साथ लगातार सुधार हुआ है।

दालों और धान में सबसे अधिक सुधार हुआ है। कुल मिलाकर, इस वर्ष संचयी वर्षा पिछले वर्ष 684.6 मिमी की तुलना में अब तक 817.9 मिमी पर बहुत अधिक बनी हुई है। मॉनसून का प्रक्षेपवक्र मोटे तौर पर IMD के अनुमानों के मुताबिक विकसित हुआ है। गुप्ता ने बैंक ऑफ बड़ौदा के नवीनतम अपडेट में कहा कि यह मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण के लिए सकारात्मक होना चाहिए।

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