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चिकन बिरयानी में मिला कीड़ा, रेस्टॉरेंट को देना होगा ₹13,000 का मुआवजा, हर रविवार को खिलानी होगी 2 प्लेट बिरयानी

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 10, 2026 10:42 pm IST,  Updated : Jun 10, 2026 11:34 pm IST

8 दिसंबर, 2025 को मणिकंदन अपने एक दोस्त के साथ एम.जी. रोड पर स्थित एक मशहूर रेस्टोरेंट में चिकन बिरयानी खाने गए थे।

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चिकन बिरयानी (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : PIXABAY

पुडुचेरी की जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले में 13,000 रुपये के मुआवजे समेत 5 हफ्तों तक प्रत्येक सोमवार को दो प्लेट फ्री चिकन बिरयानी देने के आदेश दिए हैं। ये पूरा मामला 8 दिसंबर, 2025 का है, जब 26 साल के मणिकंदन को चिकन बिरयानी में मरा हुआ कीड़ा मिला था। मणिकंदन ने इस मामले में रेस्टॉरेंट के खिलाफ 26 दिसंबर, 2025 को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने रेस्टॉरेंट को मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही में हुए खर्च के लिए 3000 रुपये समेत कुल 13,000 रुपये के मुआवजा देने के आदेश दिए। आयोग ने इसके साथ ही मणिकंदन को 5 हफ्तों तक प्रत्येक रविवार को 2 प्लेट ताजा चिकन बिरयानी खिलाने के भी आदेश दिए हैं।

8 दिसंबर को दोस्त के साथ चिकन बिरयानी खाने गया था उपभोक्ता

8 दिसंबर, 2025 को मणिकंदन अपने एक दोस्त के साथ एम.जी. रोड पर स्थित एक मशहूर रेस्टोरेंट में चिकन बिरयानी खाने गए थे। मणिकंदन ने दो प्लेट चिकन बिरयानी ऑर्डर की थी, जिसके लिए उन्होंने कुल 558 रुपये का भुगतान किया था। चिकन बिरयानी खाते-खाते मणिकंदन को उसमें एक मरा हुआ कीड़ा दिखा, जो मक्खी की तरह दिख रहा था। मणिकंदन ने चिकन बिरयानी में मिले कीड़े की फोटो ली और वीडियो भी बनाई, जिसे बाद में सबूत के तौर पर आयोग में पेश की गई। रेस्टॉरेंट को इस मामले की जानकारी गूगल रिव्यू से मिली थी।

उपभोक्ता आयोग ने रेस्टॉरेंट को पाया दोषी

उपभोक्ता आयोग ने मामली की सुनवाई करते हुए रेस्टॉरेंट को दोषी पाया। आयोग ने कहा कि खाने-पीने की सर्विस से जुड़े प्रतिष्ठानों पर स्वच्छता और साफ-सफाई के कड़े मानकों को बनाए रखने की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे प्रतिष्ठान 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' के प्रावधानों के तहत आते हैं। उन्हें खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2011 की अनुसूची 4 के तहत तय किए गए मानकों का पालन करना होता है, जिनमें स्वच्छता, साफ-सुथरे तरीके से भोजन को संभालना और परिसर को साफ रखना जरूरी है। आयोग ने कहा कि खाने में कीड़ा मिलना सर्विस में कमी माना जाता है।

मणिकंदन ने आयोग में खुद ही रखा था अपना पक्ष

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिकंदन ने इस मामले में खुद ही अपना पक्ष रखा था और उन्होंने इसके लिए किसी वकील की सेवाएं नहीं ली थी। खाने में मरे हुए कीड़े की मौजूदगी उपभोक्ता की सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता था। उपभोक्ता आयोग ने 30 अप्रैल, 2026 को मणिकंदन के पक्ष में आदेश दिया।

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