महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को राज्य की सहकारी और निजी चीनी मिलों के लिए एक प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य चीनी मिलों की वित्तीय क्षमता बढ़ाना और गुणवत्ता प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह योजना “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और राज्य की सहकारी चीनी उद्योग की हीरक जयंती के अवसर पर शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य-राज्य की चीनी मिलों की गुणवत्ता में सुधार करना, वित्तीय क्षमता का विकास करना और प्रतिस्पर्धी गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाली मिलों को पहचानकर पुरस्कृत करना है।
मूल्यांकन किस आधार पर होगा
योजना के तहत, राज्य की सभी चीनी मिलों का हर वर्ष नौ प्रमुख मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। प्रत्येक मानक पर अंक निर्धारित किए गए हैं, और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली मिलों को पुरस्कार दिए जाएंगे।
मूल्यांकन मानक अंक
पिछले तीन वर्षों में किसानों को समय पर 100% FRP भुगतान 15
मिल के अन्य विभागों का प्रदर्शन 10
उच्चतम चीनी रिकवरी दर 10
प्रति हेक्टेयर उत्पादन 10
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग और अधिकतम क्षेत्र कवरेज 10
कम कार्बन उत्सर्जन और उच्च कार्बन क्रेडिट्स 10
सरकारी ऋण की समय पर अदायगी 10
लागत कुशलता, ऑडिट और परिचालन दक्षता 5
कर्मचारी संख्या सीमाएं और समय पर वेतन भुगतान 5
चयन प्रक्रिया
योजना के तहत दो-स्तरीय चयन प्रक्रिया बनाई गई है। क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक अपने-अपने विभागों से 6 सर्वश्रेष्ठ मिलों की सूची भेजेंगे, जिनमें 3 सहकारी और 3 निजी क्षेत्र की मिलें शामिल होंगी। यह सूची चीनी आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति को भेजी जाएगी, जो आगे 6 सहकारी और 6 निजी मिलों को शॉर्टलिस्ट करेगी। इसके बाद, राज्य के सहकार मंत्री की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति अंतिम रूप से हर कैटेगरी की 3 विजेता मिलों का चयन करेगी। सरकार ने कहा है कि पुरस्कारों और प्रोत्साहन की राशि तथा अन्य विवरणों की घोषणा शीघ्र ही अलग से की जाएगी।






































