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'होम लोन की ब्याज दर घटकर 6% पर आनी चाहिए', नारेडको प्रेसिडेंट ने इस वजह से की मांग, बताया क्या होगा फायदा

 Published : Jun 27, 2025 05:57 pm IST,  Updated : Jun 27, 2025 05:57 pm IST

NAREDCO के प्रेसिडेंट ने कहा कि लोगों की सैलरी में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है कि वह घरों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से मेल खा सके। पिछले तीन वर्षों में आवास की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे संभावित ग्राहकों की सामर्थ्य प्रभावित हुई है।

जमीन की ऊंची कीमत ने डेवलपर्स के लिए अफोर्डेबल घर बनाना मुश्किल बना दिया है।- India TV Hindi
जमीन की ऊंची कीमत ने डेवलपर्स के लिए अफोर्डेबल घर बनाना मुश्किल बना दिया है। Image Source : FREEPIK

घरों की बिक्री को बढ़ाने के मकसद से रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन नारेडको के अध्यक्ष जी हरि बाबू ने शुक्रवार को मांग की है कि होम लोन पर ब्याज दर को घटाकर 6 प्रतिशत के आस-पास किया जाना चाहिए। उन्होंने यह मांग इस वजह से की, क्योंकि इस साल के पहले छह महीनों के दौरान देश के शीर्ष सात शहरों में बिक्री में गिरावट देखी गई है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, उन्होंने घरों की बिक्री में गिरावट के लिए अतिरिक्त आपूर्ति, आवासीय संपत्तियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और दुनिया में आर्थिक अनिश्चितताओं को जिम्मेदार ठहराया।

बढ़ी कीमतों ने बिक्री को कर दिया सुस्त

खबर के मुताबिक, रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी ने चालू अप्रैल-जून अवधि के दौरान बिक्री में 19 प्रतिशत की गिरावट और 9 प्रमुख शहरों में पिछली तिमाही में 23 प्रतिशत की गिरावट की जानकारी दी है। प्रॉपर्टी कंसल्टेशन एनारॉक ने शीर्ष 7 शहरों में लेटेस्ट जून तिमाही में 20 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है। बिक्री में गिरावट क्यों आई, इसको लेकर उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में आवास की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे संभावित ग्राहकों की सामर्थ्य प्रभावित हुई है।

सैलरी में बढ़ोतरी घरों की कीमतों में बढ़ोतरी से नहीं खा रहे मेल 

एक सम्मेलन के दौरान हरि बाबू ने कहा कि सैलरी में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है कि वह घरों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से मेल खा सके। इसके अलावा, नारेडको अध्यक्ष ने कहा कि हैदराबाद सहित कई शहरों में अतिरिक्त सप्लाई है। साथ ही उन्होंन यह भी कहा कि दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते घर खरीदारों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। जुलाई-सितंबर तिमाही में भी मांग कम रहने की संभावना है। फरवरी से रेपो दर में 100 आधार अंकों की कमी करने के आरबीआई के फैसले के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर, नारेडको अध्यक्ष ने कहा कि इससे निश्चित रूप से ग्राहकों को कुछ राहत मिली है क्योंकि ईएमआई (समान मासिक किस्त) घटकर 7.5-8 प्रतिशत रह गई है।

जमीन की ऊंची कीमत से अफोर्डेबल घर बनाना मुश्किल

नारेडको अध्यक्ष ने आवास परियोजनाओं के निर्माण के लिए बाजार में ज्यादा भूमि लाने के लिए टियर I-II शहरों में झुग्गियों के रीडेवलपमेंट के लिए एक नई नीति की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद जमीन की लागत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जमीन की ऊंची कीमत ने डेवलपर्स के लिए अफोर्डेबल घर बनाना मुश्किल बना दिया है। प्रॉपइक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, इस कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही में आवास की बिक्री 19 प्रतिशत घटकर 94,864 यूनिट रह जाने की उम्मीद है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 1,16,432 यूनिट थी। एनारॉक के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में शीर्ष सात शहरों में आवास की कीमतों में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे बिक्री में 20 प्रतिशत की गिरावट आई।

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