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अब डीजल पर ₹55.5 और एटीएफ पर देनी होगी ₹42 की एक्सपोर्ट ड्यूटी, सरकार ने की भारी बढ़ोतरी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Apr 11, 2026 08:02 pm IST,  Updated : Apr 11, 2026 08:02 pm IST

सरकार ने 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी।

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सरकार ने 26 मार्च को डीजल और एटीएफ पर लगाया था एक्सपोर्ट ड्यूटी Image Source : AFP

सरकार ने शनिवार को डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी। सरकार ने डीजल की एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जो पहले 21.5 रुपये था। जबकि, एटीएफ (विमान ईंधन) के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर अब 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 29.5 रुपये था। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में ये बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। बताते चलें कि सरकार ने मार्च के आखिर में डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर किसी तरह की कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगाई गई है।

सरकार ने 26 मार्च को डीजल और एटीएफ पर लगाया था एक्सपोर्ट ड्यूटी

सरकार ने 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में डीजल और एटीएफ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए इनके एक्सपोर्ट पर ये टैक्स लगाए लगाए थे। इन एक्सपोर्ट ड्यूटी का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का गलत फायदा उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बताते चलें कि दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं और इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ईरान पर हमला शुरू होने के बाद खड़ा हुआ सप्लाई का संकट

बताते चलें कि अमेरिका और ईरान ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए थे। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए थे। ईरान ने इसके साथ ही, अपने नियंत्रण वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई ठप हो गई थी, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल 2 हफ्तों के संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे, जिससे पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में पैदा हुआ व्यवधान फिलहाल थमा है।

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