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Oil India 2040 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए करेगी 25,000 करोड़ का निवेश, जानिए क्या है प्लान

 Edited By: Pawan Jayaswal
 Published : Sep 15, 2024 06:34 am IST,  Updated : Sep 15, 2024 06:34 am IST

कंपनी अरुणाचल प्रदेश के खेतों से असम तक प्राकृतिक गैस लाने के लिए 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की भी योजना बना रही है, ताकि परिवहन और उद्योगों में प्रदूषणकारी तरल ईंधन की जगह ली जा सके।

ऑयल इंडिया लिमिटेड- India TV Hindi
ऑयल इंडिया लिमिटेड Image Source : FILE

सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन रंजीत रथ ने शनिवार को कहा कि कंपनी 2040 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में मदद के लिए स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 25,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है। ओआईएल की शुद्ध शून्य योजना में गैस के जलने में कटौती और फंसे हुए गैस के व्यावसायीकरण के साथ-साथ नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता की स्थापना तथा हरित हाइड्रोजन, बायोगैस और इथेनॉल संयंत्रों का निर्माण शामिल है।

बांग्लादेश को जारी है डीजल निर्यात

रथ ने कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक अशांति के बावजूद, भारत ने बांग्लादेश को डीजल निर्यात करना जारी रखा है और कारोबार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि असम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी पाइपलाइन के जरिए कंपनी बांग्लादेश को डीजल निर्यात करती है। रथ ने कहा, "इसमें कोई व्यवधान नहीं है।" नुमालीगढ़ रिफाइनरी ओआईएल की सब्सिडियरी कंपनी है और रथ रिफाइनरी के भी चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी (असम) से पार्वतीपुर (बांग्लादेश) पाइपलाइन के जरिए डीजल का निर्यात जारी है। यह पाइपलाइन भारत में 5.156 किलोमीटर से होकर गुजरती है, जबकि बांग्लादेश में यह 124.346 किलोमीटर से होकर गुजरती है।

यहां बिछेगी 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि शुद्ध शून्य योजनाएं कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को 2025-26 तक 90 लाख टन तेल और तेल समकक्ष गैस तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ-साथ चलेंगी, जो पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में उत्पादित 65 लाख टन है। कंपनी अरुणाचल प्रदेश के खेतों से असम तक प्राकृतिक गैस लाने के लिए 80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की भी योजना बना रही है, ताकि परिवहन और उद्योगों में प्रदूषणकारी तरल ईंधन की जगह ली जा सके।

शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य

उन्होंने कहा, “शुद्ध शून्य लक्ष्य हासिल करने के लिए कई तरह की गतिविधियों की जरूरत होती है।” उन्होंने कहा कि कंपनी ने असम में 640 मेगावाट और हिमाचल प्रदेश में 150 मेगावाट की सौर परियोजनाओं के लिए पहले ही योजना बना ली है। ओआईएल उन सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में शामिल हो गई है जो 2070 तक भारत को शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करने में मदद करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) 2046 तक शुद्ध शून्य का लक्ष्य बना रही है, जबकि तेल और गैस उत्पादक ओएनजीसी ने 2038 तक इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और गैस उपयोगिता कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने भी अपने परिचालन से शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए 2040 तक का लक्ष्य रखा है, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2046 तक ऐसा करना चाहती है।

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