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आषाढ़ अमावस्या कब है 13 या 14 जुलाई? नोट कर लीजिए सटीक तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jul 09, 2026 09:33 am IST,  Updated : Jul 09, 2026 09:33 am IST

आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान-दान करने के साथ ही पितरों की उपासना का भी विधान है। इस दिन ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद के साथ ही पुण्य फल भी मिलते हैं। तो यहां जानिए आषाढ़ अमावस्या की सही डेट, महत्व और स्नान-दान का मुहूर्त।

आषाढ़ अमावस्या 2026- India TV Hindi
आषाढ़ अमावस्या 2026 Image Source : PEXELS

हिंदू धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। हर माह में आने वाली अमावस्या महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य लाभ मिलते हैं। इसके साथ ही अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध भी किया जाता है। इस दिन ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है साथ ही पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। आषाढ़ माह की अमावस्या का भी विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। तो आइए जानते हैं इस साल आषाढ़ अमावस्या कब है और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है?

इस साल अमावस्या तिथि को लेकर लोग असमंजस की स्थिति में है लेकिन यहां हम आपका सारा कंफ्यूजन दूर कर देंगे। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण अमावस्या तिथि का आरंभ 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन  14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026 को है। 

आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या करें?

अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है। ऐसे में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए आषाढ़ अमावस्या के दिन  तर्पण करें। धार्मिक मान्यता है कि जिन पर पितरों की कृपा रहती है उस व्यक्ति को हर सुख मिलता है। घर-परिवार में भी सुख-समृद्धि, संपन्नता और खुशहाली बनी रहती है। वहीं पितृ दोष लगने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानी घेर लेती और घर का वातावरण भी नकारात्मक बना रहता है। 

  • पितृ तर्पण- अमावस्या के दिन  हाथ में जल, काले तिल, और कुशा लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का तर्पण करें।

  • दान करें- गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, तिल, वस्त्र, धन और छाता का दान करें।

  • पीपल पेड़ की पूजा- पीपल पेड़ में त्रिदेव के साथ ही पितरों का भी वास होता है। तो अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीया जलाएं।

  • दक्षिण दिशा में दीया जलाएं- आषाढ़ अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद शाम के समय दक्षिण दिशा में एक सरसों तेल का दीया जलाएं। आपको बता दें कि दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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