हिंदू धर्म में सभी पूर्णिमा तिथियों को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान का विधान है। पूर्णिमा के दिन ये कार्य करने से व्यक्ति को पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है। इस पूर्णिमा को आषाढ़ी पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा भी कहते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस साल आषाढ़ पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 29 जुलाई को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। वहीं इसी दिन पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाएगा। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 7 बजकर 20 मिनट रहेगा। वहीं बता दें कि आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन यानी 30 जुलाई से पवित्र माह सावन का भी आरंभ हो रहा है। यह महीन भगवान शिव को समर्पित है और पूरे सावन मास में महादेव की आराधना करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त
स्नान-दान के लिए आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से दोपहर तक का समय उत्तम रहेगा। वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 46 मिनट से सुबह 5 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 55 मिनट से दोपहर 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन अभिजित मुहूर्त कोई नहीं रहेगा।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन क्या दान करें
पूर्णिमा के दिन गरीब और जरूरतमंदों को दान करने से धन-धान्य में बरकत आती है। इसके साथ ही व्यक्ति को कई गुना अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन किन-किन चीजों का दान करना चाहिए।
- अन्न (चावल, गेहूं)
- घी
- गुड़
- कपड़े
- छाता
- धन
आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) का महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। यह दिन गुरु और शिष्य परंपरा को समर्पित है। शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरु का विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन अपने गुरुओं को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें और हो सकें तो कुछ गुरु दक्षिणा भी जरूर दें। गुरु पूर्णिमा के दिन ऐसा करने से आपके ऊपर गुरु कृपा हमेशा बनी रहेगी। वहीं गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, वेद व्यास और अपने गुरुजनों की पूजा करने से पु्ण्य फलों की प्राप्ति होती है। बता दें कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास जयंती भी मनाई जाती है, जिसे व्यास पूजा या व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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