अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के कई अहम ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए हैं। ताजा हमलों में ईरान के चाबहार, बुशहर और बंदर अब्बास में अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला हुआ है। ये हमला ऐसे समय में हुआ है, आज जब 9 जुलाई को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला सैय्यद अली ख़ामेनेई का जनाजा मशहद पहुंच रहा है, जहां आज ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। हालांकि, अमेरिका ने जिन शहरों पर मिसाइलें बरसाई हैं, उनमें से चाबहार और बुशहर की दूरी मशहद से करीब 1100 से 1200 किलोमीटर दूर है।
ट्रंप बोले- अब 'काम तमाम' कर देना चाहिए
अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना और ईरान के हमला करने की क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े और विरोधाभासी बयानों ने युद्ध की आशंकाओं को और हवा दे दी है।
NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि उनके मुताबिक ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अब मैं कोई समझौता चाहता हूं। हम खेल खेल सकते हैं, लेकिन अमेरिकी सेना को अब 'काम तमाम' कर देना चाहिए। अगर जरूरत पड़ी, तो हम उन पर फिर से बड़ा हमला करेंगे।"
हालांकि, इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इन हमलों का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका लंबे समय के युद्ध में उतर रहा है। उन्होंने कहा कि जो भी होगा, बहुत तेजी से होगा। वहीं, मिलवॉकी में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "ईरान सिर्फ एक हफ्ते तक सुधरा रहा। अगर वे हमारे जहाजों पर हमला करेंगे, तो हम उन्हें तबाह कर देंगे।"
ईरान का पलटवार- धौंस जमाने का दौर खत्म
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों को खारिज किया है और अमेरिका पर ही समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "ट्रंप प्रशासन ने शुरुआती समझौते की शर्तों का बार-बार उल्लंघन किया है, जिससे हमें जवाब देने पर मजबूर होना पड़ा। धौंस जमाने और जबरन वसूली का दौर अब खत्म हो चुका है। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। हम झुकने वाले नहीं हैं।" ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन Strait of Hormuz के नियमों का उल्लंघन कर रहा है और लेबनान में इजरायली सेना की वापसी सहित सीजफायर को लागू कराने में नाकाम रहा है।
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