देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते कुछ दिनों से बड़े संकट से गुजर रही है। कंपनी को पिछले दो दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और जो चली भी हैं, उनमें से काफी फ्लाइट्स ने तो घंटों की देरी से उड़ान भरी। इससे एयरपोर्ट पर लंबी लाइन लग गई और यात्री भी काफी परेशान हुए। ऐसे में सभी के मन में यही सवाल उठ रहा था कि इतनी बड़ी एयरलाइन अचानक कैसे बिगड़ गई?
दो दिन में 280+ उड़ानें रद्द
इंडिगो की मंगलवार को करीब 130 उड़ानें और बुधवार को 150 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुई। मंगलवार को तो इंडिगो की हर 10 में से सिर्फ 3 उड़ानें ही समय पर उड़ीं, जो इंडिगो जैसे समय का खास पालन करने वाली एयरलाइन के लिए बड़ी बात है।
DGCA का नया नियम समस्या की जड़?
यह पूरा संकट दरअसल DGCA द्वारा लागू किए गए नए पायलट रेस्ट और ड्यूटी-ऑवर नियमों से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच पायलट केवल सीमित संख्या में लैंडिंग कर सकते हैं, साथ ही वीकेंड का रेस्ट टाइम भी बढ़ा दिया गया है। DGCA ने एयरलाइंस की अपील के बावजूद इन नियमों को लागू किया, जिससे इंडिगो पर अचानक ज्यादा संख्या में पायलटों की जरूरत बढ़ गई।
तकनीकी गड़बड़ी और खराब मौसम
इंडिगो ने तकनीकी गड़बड़ी, खराब मौसम औरएयरपोर्ट कंजेशन जैसे कारण भी गिनाए, लेकिन एयरलाइन से जुड़े कई अधिकारियों ने कहानी का दूसरा पहलू भी बताया, जो है खराब प्लानिंग। सूत्रों के मुताबिक, इंडिगो ने न तो पर्याप्त नए पायलटों की भर्ती की और न ही फर्स्ट ऑफिसर्स को कैप्टन बनाने की प्रक्रिया तेज की। नतीजा यह हुआ कि जब नए नियम लागू हुए, तो एयरलाइन के पास एक्स्ट्रा पायलट बफर 'जीरो' हो गया। पायलटों को लगातार री-शेड्यूल किया गया, लंबे ड्यूटी ऑवर दिए गए और कई को एक शहर से दूसरे शहर डेडहेडिंग यानी पैसेंजर की तरह भेजना पड़ा।
भर्ती–ट्रेनिंग में सुस्ती
इंडिगो की उड़ान क्षमता पर भी काफी दबाव रहा है। एयरबस से नए विमान समय पर नहीं मिल रहे और प्रैट एंड व्हिटनी इंजन की दिक्कतों के कारण 40 से ज्यादा प्लेन जमीन पर खड़े हैं। कंपनी ने 20 से ज्यादा किराये के विमान जोड़े, लेकिन इन्हें उड़ाने वाले पायलट इंडिगो के सीधे अधीन नहीं होते, जिससे संचालन में मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, कंपनी ने खर्च कम रखने के लिए पायलटों की भर्ती और ट्रनिंग की स्पीड भी धीमी कर दी। इंडिगो को लगा कि उनके पायलट कम उड़ानें भर रहे हैं, इसलिए नए पायलटों की जरूरत नहीं है। लेकिन कई अधिकारियों का कहना है कि छोटे शहरों में पायलटों का काम कम था, जबकि बड़े शहरों में पायलट पहले से ही ज्यादा दबाव में काम कर रहे थे।
पायलटों के लिए DGCA के नए नियम
- पहले पायलट को हर हफ्ते 36 घंटे लगातार आराम मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है।
- एयरलाइन कंपनियों को हर तीन महीने में रिपोर्ट देनी होगी जिसमें उनको बताना हो कि पायलटों ने थकान की शिकायत की या नहीं। साथ ही, एयरलाइन को यह भी बताना होगा कि उन्होंने थकान कम करने के लिए क्या कदम उठाए।
- पहले नाइट ड्यूटी की सीमा आधी रात तक मानी जाती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर मध्यरात्रि से सुबह 6 बजे कर दिया गया है। नाइट ड्यूटी के दौरान अधिकतम उड़ान समय- 8 घंटे, अधिकतम ड्यूटी अवधि- 10 घंटे, लगातार रात की ड्यूटी- अधिकतम 2 और रात में लैंडिंग अधिकतम- 2। ये नियम 1 नवंबर 2025 से लागू हो चुके हैं।






































