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सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर लगाया जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

तीन मार्च, 2025 तक की गणना के अनुसार यह क्षतिपूर्ति या जुर्माना 3.1 करोड़ रुपये था। आरएनईबीएसएल ने उक्त माइलस्टोन-1 की के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया है।

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Published : Mar 04, 2025 06:54 pm IST, Updated : Mar 05, 2025 10:19 am IST
Reliance Industries - India TV Paisa
Photo:FILE रिलायंस इंडस्ट्रीज

सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एक इकाई पर बैटरी सेल संयंत्र स्थापित करने की समयसीमा को पूरा करने में विफल रहने के लिए जुर्माना लगाया है। इसके लिए उसे उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन Production Linked Incentive (PLI) दिए गए थे। कंपनी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रिलायंस ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसकी अनुषंगी कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी बैटरी स्टोरेज लिमिटेड को तीन मार्च को भारी उद्योग मंत्रालय से एक पत्र मिला, जिसमें एक जनवरी, 2025 से प्रत्येक दिन की देरी के लिए प्रदर्शन सुरक्षा (50 करोड़ रुपये) की 0.1 प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति वसूलने का निर्देश दिया गया है। इसमें कहा गया है कि यह जुर्माना “उन्नत रसायन सेल के लिए प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदान की गई पांच गीगावाट घंटा विनिर्माण क्षमता के संबंध में मंत्रालय के साथ निष्पादित कार्यक्रम समझौते के तहत माइलस्टोन-1 को हासिल करने में देरी के लिए लगाया गया है।“ 

समय बढ़ाने का अनुरोध किया

तीन मार्च, 2025 तक की गणना के अनुसार यह क्षतिपूर्ति या जुर्माना 3.1 करोड़ रुपये था। आरएनईबीएसएल ने उक्त माइलस्टोन-1 की के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया है। हालांकि, फर्म ने न तो देरी के कारणों का और न ही लक्ष्य को पूरा करने की नई समयसीमा का खुलासा किया। आरएनईबीएसएल ने 2022 में लगभग 40 करोड़ डॉलर के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) के साथ 10 गीगावाट-घंटा बैटरी क्षमता बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह अनुबंध भारत में विकसित एक नवीन ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के लिए घरेलू विनिर्माण प्राप्त करने की सरकारी पहल का हिस्सा था। 

30 गीगावाट घंटा क्षमता का निर्माण करना था

आरएनईबीएसएल के अलावा, राजेश एक्सपोर्ट्स और ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड की इकाई ने भी बैटरी सेल संयंत्र बनाने के लिए बोलियां जीती थीं। विनिर्माता इस परियोजना के लिए लक्ष्य पूरा करने पर 181 करोड़ रुपये के उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन के लिए पात्र थे, जिसका उद्देश्य उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण की संचयी 30 गीगावाट घंटा क्षमता का निर्माण करना था। 

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