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ट्रंप टैरिफ से कारोबारी भरोसा और उपभोक्ता धारणा कमजोर होगी, भारत पर पड़ेगा बुरा असर: मूडीज

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Apr 13, 2025 03:09 pm IST,  Updated : Apr 13, 2025 03:10 pm IST

डांग ने कहा कि यह 90-दिवसीय राहत दोनों देशों के सरकारों को बातचीत करने का अवसर देती है। हालांकि अनिश्चितताओं के चलते उपभोक्ता भावना और घरेलू मांग में गिरावट देखने को मिल सकती है।

Moody- India TV Hindi
मूडीज Image Source : FILE

रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनियाभर के देशों पर टैरिफ बढ़ाने से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ेगी। इस अनिश्चितता से एशियाई देशों, खासकर भारत की आर्थिक वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, इससे कारोबारी विश्वास और उपभोक्ता भावना कमजोर हो सकती है, जो घरेलू मांग और निवेश को प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को छोड़कर अन्य देशों पर लगाए गए जवाबी शुल्कों को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है, हालांकि मूल 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क अभी भी लागू रहेगा।

ग्रोथ की रफ्तार होगी सुस्त 

मूडीज रेटिंग्स की वरिष्ठ उपाध्यक्ष, निकी डांग ने कहा कि अमेरिका-चीन तनाव और चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती एशियाई क्षेत्र की वृद्धि संभावनाओं के लिए प्रमुख निगेटिव रिस्क पैदा करते हैं। भारत जैसे बड़े घरेलू बाजार वाली इकोनॉमी को कुछ लाभ मिल सकता है, लेकिन निवेश में बड़े बदलाव दीर्घकालिक प्रक्रिया होगी। मूडीज की सहयोगी संस्था मूडीज एनालिटिक्स ने भारत की 2025 की अनुमानित वृद्धि दर को फरवरी के 6.4% से घटाकर अब 6.1% कर दिया है। यह कटौती वैश्विक व्यापार अस्थिरता और घरेलू मांग में संभावित गिरावट के मद्देनज़र की गई है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

विशेषज्ञों के अनुसार, यह 90-दिन की राहत अवधि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं और इसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर 2025 तक पूरा करने की योजना है। डांग ने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि विश्व व्यापार प्रणाली, जो पहले विश्वास और नियम-आधारित थी, अब बदलाव के दौर में है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबी अवधि का गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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