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PhonePe के ₹100 वाले वॉलेट इनएक्टिविटी फीस पर यूजर्स कंफ्यूज, कंपनी ने बताई ये बातें

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 20, 2026 04:45 pm IST,  Updated : Jun 20, 2026 04:45 pm IST

फोनपे ने स्पष्ट किया है कि इनएक्टिव पड़े वॉलेट पर लगने वाली 'इनएक्टिविटी फीस' का यूजर्स के बैंक खातों या यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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PhonePe के ₹100 वाले वॉलेट इनएक्टिविटी फीस पर यूजर्स कंफ्यूज Image Source : PHONEPE

डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे ने अपनी वॉलेट पॉलिसी में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। नई पॉलिसी के मुताबिक, अगर कोई यूजर लगातार 365 दिनों तक अपने वॉलेट से ट्रांजैक्शन नहीं करता है तो ऐसे वॉलेट को इनएक्टिव माना जाएगा। इसके बाद, कंपनी अपने यूजर्स से हर तिमाही के लिए 100 रुपये (जीएसटी सहित) का 'इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फीस' वसलेगी। कंपनी की इस नई पॉलिसी को लेकर यूजर्स के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। कंपनी ने अपने यूजर्स के इन्हीं सवालों के जवाब दिए हैं।

बैंक खातों या यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा असर

फोनपे ने स्पष्ट किया है कि इनएक्टिव पड़े वॉलेट पर लगने वाली 'इनएक्टिविटी फीस' का यूजर्स के बैंक खातों या यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने ये स्पष्टीकरण कुछ ग्राहकों को भेजी गई सूचनाओं के बाद जारी किया, जिनसे डिजिटल वॉलेट और यूपीआई के ऑपरेशन्स को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। कंपनी ने कहा कि ये फीस सिर्फ फोनपे वॉलेट पर लागू होता है, जो एक प्रीपेड भुगतान साधन (पीपीआई) है। इसका संबंध यूपीआई पेमेंट से नहीं है, जहां पैसे सीधे बैंक खाते से कटती है।

फोनपे अकाउंट, यूपीआई अकाउंट और फोनपे वॉलेट हैं अलग-अलग सर्विस

फोनपे के अनुसार, कई यूजर्स फोनपे अकाउंट, यूपीआई अकाउंट और फोनपे वॉलेट को एक ही सर्विस मानते हैं, जबकि ये तीनों अलग-अलग सर्विस हैं और इन पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि अगर किसी यूजर के वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो इनएक्टिविटी फीस उसके बैंक खाते या यूपीआई के माध्यम से नहीं वसूला जाएगा। 

अलग-अलग दर्ज होते वॉलेट एक्टिविटी और यूपीआई एक्टिविटी

कुछ ग्राहकों ने ये सवाल भी उठाया कि वे नियमित रूप से फोनपे ऐप का उपयोग करते हैं, फिर भी उन्हें इनएक्टिविटी से जुड़ी सूचनाएं क्यों मिली हैं। इस पर कंपनी ने कहा कि वॉलेट की एक्टिविटी और यूपीआई एक्टिविटी को अलग-अलग दर्ज किया जाता है। ऐसे में कोई ग्राहक क्यूआर कोड पेमेंट, मनी ट्रांसफर या बिल पेमेंट के लिए नियमित रूप से यूपीआई का इस्तेमाल करता रहे, फिर भी उसका वॉलेट लंबे समय तक उपयोग नहीं होने पर इनएक्टिव माना जा सकता है। 

इनएक्टिविटी फीस काटने से 15 दिन पहले यूजर्स को भेजी जाती है सूचना

कंपनी के अनुसार, किसी वॉलेट से इनएक्टिविटी फीस काटने से 15 दिन पहले यूजर्स को सूचना भेजी जाती है। इस अवधि में ग्राहक वॉलेट को फिर से एक्टिव कर सकता है, उसमें पैसे डाल सकता है, पात्र बैलेंस निकाल सकता है या वॉलेट बंद कर सकता है। फोनपे ने ये भी स्पष्ट किया कि वॉलेट को दोबारा एक्टिव करने के लिए 'केवाईसी' कराना जरूरी नहीं है। सामान्य तौर पर ओटीपी वैरिफिकेशन और वॉलेट से सिर्फ एक ट्रांजैक्शन के जरिए भी इसे एक्टिव किया जा सकता है। 

कैशबैक को लेकर क्या है कंफ्यूजन

कंपनी ने कहा कि कैशबैक को लेकर भी यूजर्स में भ्रम की स्थिति है। आमतौर पर कैशबैक फोनपे वॉलेट में जमा नहीं होती, बल्कि अलग 'गिफ्ट कार्ड बैलेंस' में जमा की जाती है। इसलिए कैशबैक मिलने का मतलब ये नहीं है कि वॉलेट एक्टिव है या उन पैसों पर इनएक्टिविटी फीस लागू होगी।

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