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क्या इस बार महंगा हो जाएगा लोन? महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच ब्याज दरों पर क्या रह सकता है RBI का रुख

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 26, 2026 08:20 am IST,  Updated : May 26, 2026 08:20 am IST

अगर कीमतों पर दबाव बना रहता है, तो प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी सिर्फ साल के अंत में ही संभव है।

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा Image Source : PTI

ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से महंगाई का जोखिम भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे माहौल में, अगले महीने होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लेगी, इस पर संशय बना हुआ है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि पेट्रोल, डीजल, सीएनजी की बढ़ती कीमतों और मानसून की अनिश्चितता के कारण महंगाई के बढ़ते जोखिम के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त नहीं करेगा। इक्रा का कहना है कि आरबीआई जून में होने वाली MPC मीटिंग में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है।

कीमतों पर बना रहा दबाव तो दिसंबर में बढ़ाई जा सकती हैं ब्याज दरें

अगर कीमतों पर दबाव बना रहता है, तो प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी सिर्फ साल के अंत में ही संभव है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ''हमें नहीं लगता कि एमपीसी फिलहाल रेपो रेट में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी करेगी। ये सप्लाई में अचानक आई कमी है। ये कोविड संकट से बहुत अलग है, जो सप्लाई और डिमांड दोनों में एक साथ आई कमी थी।'' उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक कदम उठाने से पहले, दूसरे दौर की महंगाई के प्रभावों के प्रमाण का इंतजार करेगा। हाल ही में खुदरा ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद, इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने औसत खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अनुमान को बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।

आखिरी बार दिसंबर 2025 में घटाया गया था रेपो रेट

महंगाई को लेकर इक्रा का ये अनुमान आरबीआई के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ज्यादा है। हालांकि, एजेंसी को उम्मीद है कि एमपीसी अगले 2 मौद्रिक नीति समीक्षाओं के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगी। अक्टूबर में रुख में संभावित बदलाव होगा और अगर जरूरत पड़ी तो दिसंबर की पॉलिसी में ही रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाएगी। बताते चलें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में बदलाव किया था। उस समय, आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था।

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