मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि बाजार नियामक यानी सेबी डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड उत्पादों को रेगुलेट करने पर विचार नहीं कर रहा, क्योंकि ये उत्पाद सेबी के अधिकार क्षेत्र में आते ही नहीं। पीटीआई की खबर के मुताबिक, नेशनल कॉन्क्लेव ऑन REITs और InvITs-2025 के दौरान उन्होंने कहा कि जो निवेशक गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, वे म्यूचुअल फंड्स के गोल्ड ETF, या अन्य ट्रेडेबल गोल्ड सिक्योरिटीज जैसे पूरी तरह रेगुलेटेड विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं।
सेबी का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब डिजिटल गोल्ड उद्योग ने हाल ही में नियामक से आग्रह किया था कि डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स को औपचारिक तौर पर रेगुलेट किया जाए, ताकि निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सेबी की चेतावनी
इस महीने की शुरुआत में सेबी ने निवेशकों को डिजिटल और ई-गोल्ड उत्पादों में निवेश से सावधान रहने की सलाह दी थी। सेबी ने कहा था कि ये उत्पाद सेबी के नियामकीय ढांचे से बाहर हैं, और इनमें निवेश करने से काफी जोखिम, विशेषकर काउंटरपार्टी और ऑपरेशनल रिस्क, बढ़ जाते हैं। सेबी ने यह भी देखा कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड का आसान विकल्प बताकर प्रमोट कर रहे हैं, जिससे निवेशक भ्रमित हो सकते हैं।
सेबी की आधिकारिक टिप्पणी
सेबी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल गोल्ड न तो सिक्योरिटी है, न ही कमोडिटी डेरिवेटिव, इसलिए यह पूरी तरह अनरेगुलेटेड है और सेबी इसकी निगरानी नहीं कर सकती। साथ ही, सेबी का निवेशक सुरक्षा ढांचा ऐसे अनरेगुलेटेड उत्पादों पर लागू नहीं होता, जिससे निवेशकों को कोई सुरक्षा गारंटी नहीं मिलती।
गोल्ड में निवेश करने का सुरक्षित तरीका
सेबी ने निवेशकों को सलाह दी कि वे केवल रेगुलेटेड गोल्ड इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से ही निवेश करें, जैसे- गोल्ड ETFs (म्यूचुअल फंड्स द्वारा), एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स या EGRs, जो स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड होते हैं। इन सभी उत्पादों में निवेश पंजीकृत मध्यस्थों के माध्यम से किया जाता है और ये सेबी के नियमों के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं।






































