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निवेश और बचत के बीच न हों कन्‍फ्यूज, आपके लिए जरूरी है जानना ये बातें

 Published : Sep 24, 2016 08:48 am IST,  Updated : Sep 24, 2016 09:02 am IST

बचत और निवेश में काफी अंतर है। बचत छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए है, निवेश लंबी अवधि में अपने वित्‍तीय लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए किया जाता है।

नई दिल्‍ली। बचत और निवेश में काफी अंतर होता है। बचत हम अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं, जबकि निवेश लंबी अवधि में अपने वित्‍तीय लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए किया जाता है। अक्‍सर लोग बचत को ही निवेश समझ बैठते हैं और बाद में परेशानी उठाते हैं।

अधिकांश लोग बचत और निवेश में यह गलती करते हैं, लेकिन समय रहते इसे सुधारा जा सकता है। यदि अभी देर कर दी तो शायद ये गलती काफी महंगी साबित हो सकती है।

बचत और निवेश में अंतर क्या है?

निवेश में यह कोशिश होती है कि धनराशि बढ़े। इसमें बचत के मुकाबले ज्‍यादा जोखिम होता है, लेकिन अधिक रिटर्न मिलने की संभावना भी है। निवेश लंबे समय के लिए किया जाता है। दूसरी तरफ बचत करना सुरक्षित होता है, लेकिन इसमें रिटर्न की गति धीमी होती है। ये पैसा बचाने और सुरक्षित रखने का अच्छा जरिया है, जो कम समय के लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित होता है।

लंबी अवधि के लिए होता है निवेश

निवेश के तहत आप अपने धन को एक या कई जगह लगाते हैं, और लंबी अवधि के लिए बुद्धिमानी से धन का इस्तेमाल, लाभ कमाने में करते हैं। निवेश किए हुए धन को आप जल्द ही वापस नहीं निकालते, बल्कि धन के बढ़ने का इंतज़ार करते हैं। वैसे कुछ निवेश कम अवधि के लिए भी किए जाते हैं।

कई जगह करें निवेश

निवेश में डावर्सिफिकेशन होना चाहिए। अपने धन का जोखिम कम करने के लिए आपको अलग-अलग तरह के निवेश करने चाहिए। क्योंकि सारा धन एक ही जगह निवेश करने से सारे धन के नुकसान की संभावना अधिक रहती है। आप अपना पैसा स्टॉक, बांड्स और म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। जमीन या रियल एस्‍टेट (प्रॉपर्टी) में निवेश कर सकते हैं। सोना खरीदना भी अपने आप में निवेश ही माना जाता है।

निवेश के प्रकार

  • सरकारी बांड्स
  • स्टॉक
  • म्यूचुअल फंड
  • प्रॉपर्टी
  • सोना

निवेश का जोखिम ऐसे करें कम

अपना पोर्टफोलियो तैयार करें। पोर्टफोलियो निवेशों का संग्रह (कलेक्शन) है। आप निवेश में जोखिम कम कर सकते हैं अगर आपने अलग-अलग जगह या संपत्ति में निवेश किया हो। निवेश की शुरुआत करते वक्त दो बाते बहुत मायने रखती हैं। ये हैं डायवर्सिफिकेशन और एसेट अलोकेशन।

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