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हर नौकरीपेशा कर्मचारी को कराना चाहिए अपना हेल्‍थ इंश्‍योरेंस, जानिए ऐसा करना क्‍यों है जरूरी

Written by: Abhishek Shrivastava
Published : Mar 18, 2021 11:28 am IST, Updated : Mar 18, 2021 11:28 am IST

जब आप अपने या अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो आपको कई बातों पर ध्यान देना चाहिए

 why health insurance is necessary for every Employed worker know the reason benefits importance det- India TV Paisa
Photo:INDIA TV

 why health insurance is necessary for every Employed worker know the reason benefits importance details

नई दिल्‍ली। ईलाज के लिए जिस तरह तकनीक और प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल बढ़ रहा है उसके कारण दवाईयों और अस्पताल का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। एक आम आदमी या नौकरीपेशा व्‍यक्ति के लिए मेडिकल इमरजेंसी में इन खर्चों को पूरा करना लगभग असंभव है। यही वजह है कि अलग-अलग कंपनियां अपने कर्मचारियों को मेडिकल इंश्योरेंस कवर प्रदान करती हैं।

मेडिकल इंश्योरेंस, कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली एक ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, जो दुर्घटना या अचानक हुई बीमारी में बहुत काम आती है। इसके कवर में कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्‍यों (पत्‍नी और बच्‍चों) को शामिल किया जाता है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने की शर्त के साथ चिकित्‍सा खर्चों को कवर किया जाता है।

हालांकि, कंपनी की तरफ से मिलने वाली मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी की अहमियत या इसकी वैधता तब तक है, जब तक आप कंपनी में है। कंपनी छोड़ते ही आपको इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। मतलब आपने जिस दिन कंपनी छोड़ी, आपकी पॉलिसी भी उसी दिन खत्म हो जाएगी।

ऐसा देखा गया है कि कई कर्मचारी कंपनी के हेल्थ इश्योरेंस पर ही निर्भर रहते हैं। उनका खुद का कोई पर्सनल हेल्थ कवर नहीं होता है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि उनकी और उनके परिवार की सेहत की गारंटी तब तक है, जब तक वह व्यक्ति जॉब में है। जॉब छोड़ने के बाद कंपनी उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी। जॉब छोड़ने के बाद अगर आप नई हेल्थ इश्योरेंस पॉलिसी लेते भी हैं, तो उसमें प्रतीक्षा अवधि (Waiting Period) की समस्या आ जाती है, जहां आपको पॉलिसी का लाभ लेने के लिए एक से तीन साल तक का इंतजार करना पड़ेगा।

उस दौरान आप और आपका परिवार असुरक्षित है। अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो उसके भारी खर्च का बोझ आपके ऊपर ही पड़ेगा। ऐसे में आपको वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। अब सवाल यह उठता है कि कंपनी छोड़ने के बाद दूसरे कौन से विकल्प एक कर्मचारी के पास हैं।

भारत की बात करें तो एक कर्मचारी के पास सरल और जरूरी उपाय यही है कि वह कंपनी की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ-साथ एक अलग से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद ले, ताकि जब वह जॉब छोड़े तो दूसरी पॉलिसी हमेशा उसके साथ रहे। इसके लिए वह पर्सनल हेल्थ कवर ले सकता है या फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस भी ले सकता है। जब आप अपने या अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो आपको कई बातों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे अतिरिक्त कवर, क्लेम सेटलमेंट रेशियो, प्री-पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन का खर्च आदि।

मासिक किस्‍त में भी खरीद सकते हैं हेल्‍थ इंश्‍योरेंस

अपने व अपने परिवार को सुरक्षा प्रदान करने और महंगे इलाज खर्च से बचाने के लिए स्वास्थ्य बीमा लेने की चाह रखने वालों के पास अब प्रीमियम के वार्षिक भुगतान के साथ किस्तों में भी भुगतान करने का विकल्प है। वे मासिक, तिमाही और छमाही आधार पर प्रीमियम जमा कर सकते हैं।

इरडा ने सामान्य और एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को व्यक्तिगत उत्पाद के तहत किस्तों में भुगतान करने की छूट प्रदान की है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण के इस कदम से बीमा उत्पाद पेश करने में ज्यादा लचीलापन आया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा बाजार की पहुंच भी बढ़ी है।

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